मुंबई, 07 मई।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने कहा कि वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है और बैंकिंग क्षेत्र स्थिर एवं सुदृढ़ प्रदर्शन कर रहा है।
मुंबई में आयोजित भारतीय बैंक संघ के जोखिम प्रबंधन पर पहले शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बैंकों में जोखिम प्रबंधन को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे बैंकिंग व्यवस्था के हर कार्य में शामिल करना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकिंग क्षेत्र में चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में अग्रसर है और वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जोखिम प्रबंधन को बैंकिंग के मूल कार्यों में शामिल करना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर भारतीय बैंक संघ एवं भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी ने कहा कि बैंकिंग का मूल आधार वित्तीय मध्यस्थता से जुड़े जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन है। उन्होंने यह भी कहा कि नए और उभरते जोखिम लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं, इसलिए मूल परिचालन जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारतीय बैंक संघ के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल मुरली भगत ने इस सम्मेलन को केवल वार्षिक आयोजन न बताते हुए इसे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन के नए दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।
सम्मेलन में सार्वजनिक, निजी, विदेशी और सहकारी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों समेत 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के दौरान एम. नागराजू ने बैंकिंग पेशेवरों से प्राप्त 650 से अधिक प्रविष्टियों में से चयनित शीर्ष 30 प्रविष्टियों पर आधारित एक स्मारक निबंध पुस्तक का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने जोखिम प्रबंधन प्रक्रियाओं पर आधारित एक सर्वेक्षण रिपोर्ट भी जारी की। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सामूहिक विशेषज्ञता भविष्य की वित्तीय चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






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