नई दिल्ली, 27 अप्रैल।
उच्चतम न्यायालय ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर और प्रिया कपूर के बीच सोना समूह के पारिवारिक ट्रस्ट को लेकर चल रहे लंबे विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया में भेजने का निर्णय लिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि विरासत से जुड़े इस लंबे संघर्ष में 80 वर्ष की आयु पार कर चुकी पक्षकार के लिए इस तरह की लड़ाई का कोई लाभ नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस विवाद को आगे बढ़ाने से किसी भी पक्ष को विशेष लाभ नहीं मिलने वाला है, विशेषकर इतनी अधिक आयु में इसे लंबा खींचना उचित नहीं है, इसलिए इसे मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।
मामले में रानी कपूर ने पारिवारिक आरके फैमिली ट्रस्ट को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने अपनी याचिका में ट्रस्ट के गठन और उसके संचालन की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरके फैमिली ट्रस्ट का गठन उनकी जानकारी या सहमति के बिना किया गया, जिसके चलते उन्हें ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया। साथ ही यह दावा किया गया कि ट्रस्ट की अधिकांश संपत्ति उनके स्वामित्व की थी, लेकिन गठन के समय उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई।
रानी कपूर ने यह भी कहा है कि ट्रस्ट दस्तावेजों पर उनसे बिना पूरी जानकारी दिए हस्ताक्षर कराए गए और कुछ खाली कागजों पर भी उनके हस्ताक्षर लिए गए, जब वे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति से गुजर रही थीं।



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