नई दिल्ली, 27 अप्रैल।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने उद्योगपति बीना मोदी और वरिष्ठ अधिवक्ता ललित भसीन के खिलाफ समीर मोदी द्वारा दर्ज कराए गए मामले को समाप्त कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने समीर मोदी की ओर से मामला वापस लेने की सूचना के बाद जारी किया।
सुनवाई के दौरान बीना मोदी, समीर मोदी और ललित भसीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए। सभी पक्षों से बातचीत के बाद अदालत ने पाया कि किसी लिखित समझौते या आर्थिक शर्तों पर सहमति के बिना ही आपसी सहमति से मामला वापस लेने की बात कही गई है।
अदालत द्वारा पूछे जाने पर समीर मोदी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना केस वापस ले लिया है, जिसके बाद न्यायालय ने उनके द्वारा दायर मामले को निरस्त करने का आदेश दे दिया।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने 18 मार्च को समीर मोदी की ओर से ट्रायल कोर्ट में दायर याचिका पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साकेत कोर्ट ने फरवरी में दर्ज एफआईआर पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए बीना मोदी, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र प्रसाद और ललित भसीन को समन जारी किया था। इन पर वर्ष 2024 में समीर मोदी के साथ मारपीट के आरोप लगाए गए थे।
पुलिस के अनुसार 30 मई 2024 को सुरेंद्र प्रसाद की तैनाती गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड के गेट पर की गई थी, जहां उसी दिन जसोला स्थित ओमैक्स स्क्वायर में कंपनी की बोर्ड बैठक चल रही थी। आरोप है कि बैठक के दौरान समीर मोदी वहां पहुंचे और बैठक में प्रवेश का प्रयास किया, जबकि कमरा बंद था। इस दौरान निजी सुरक्षा अधिकारी और समीर मोदी के बीच विवाद हुआ, जिसमें हाथापाई की स्थिति बनी।
समीर मोदी द्वारा दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी मां बीना मोदी ने उनके खिलाफ हमले की योजना बनाई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बीना मोदी और कंपनी के अन्य बोर्ड सदस्य प्रभावशाली हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। बताया गया कि कंपनी पर नियंत्रण को लेकर परिवार के भीतर पहले से ही विवाद चल रहा है।



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