गाजियाबाद, 25 अप्रैल
सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया था।
सलीम के खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला 20 जनवरी 1995 को सामने आया था, जब संदीप बंसल को अपहरण कर फिरौती मांगी गई थी। पुलिस की जांच में सलीम का नाम सामने आया, जिसने फिरौती की रकम लोनी फ्लाईओवर पर बस स्टैंड के पास रखवाई थी। सलीम की गिरफ्तारी के बाद शव गंदे नाले के पास बरामद किया गया था। कोर्ट ने सलीम को उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
सलीम को 2000 में दिल्ली उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिली थी, जिसके बाद वह फरार हो गया। उसने खुद को मृत घोषित कर लिया और नाम बदलकर सलीम वास्तिक के नाम से पहचान बनाई। सलीम ने हरियाणा के करनाल और अंबाला में छिपकर रहने के बाद 2010 में लोनी में बसने का फैसला किया और वहां महिलाओं के कपड़ों की दुकान खोल ली। इसके बाद वह यूट्यूब पर एक्स मुस्लिम के रूप में वीडियो भी डालने लगा।
पुलिस को सलीम के बारे में हेड कांस्टेबल मिंटू यादव से सूचना मिली, जिसके बाद इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी के नेतृत्व में टीम बनाई गई और सलीम को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि हाल ही में एक बॉलीवुड फिल्म निर्माता ने उसकी जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए 15 लाख रुपये का चेक एडवांस दिया था।
सलीम पर इसी साल फरवरी में लोनी में जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें दो हमलावरों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। हमले के बाद सलीम को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अब उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।










