नई दिल्ली, 25 अप्रैल
चुनाव आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया 24 अप्रैल को दोनों राज्यों में चुनाव अधिकारियों की देखरेख में और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में संपन्न हुई।
पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद 1,478 उम्मीदवारों को जांच प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सूचित किया गया था। जांच के दौरान 600 से अधिक उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 44,376 मतदान केंद्रों की जांच के बाद किसी भी केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर मतदान के बाद, 4,023 उम्मीदवारों को जांच में भाग लेने के लिए बुलाया गया था। इस प्रक्रिया में 1,825 उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 75,064 मतदान केंद्रों की जांच करने के बाद भी किसी केंद्र पर पुनर्मतदान की सिफारिश नहीं की गई।
चुनाव आयोग ने यह भी जानकारी दी कि इस पूरे प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई और इसके बाद फॉर्म 17A और अन्य संबंधित दस्तावेजों को सील कर दिया गया। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रूप से रखा गया है, जिनकी सुरक्षा के लिए दोहरी ताले की व्यवस्था और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी रखी गई है।
निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्ट्रॉन्ग रूम का दिन में दो बार निरीक्षण करें, जबकि जिला निर्वाचन अधिकारी को बाहरी स्ट्रॉन्ग रूम का निरीक्षण तीन-चार दिन में एक बार करना होगा। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में निगरानी के लिए कैंप लगाने की अनुमति दी गई है।









