कोलकाता, 12 मई।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। मंगलवार को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के प्रमुख और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिससे शिक्षा व्यवस्था में नई हलचल तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह आयोग लंबे समय से पूर्व शासनकाल में सामने आए चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर विवादों के केंद्र में रहा है।
इसी क्रम में पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का नाम भी शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में सामने आया था, जिसमें पूर्व अध्यक्ष कल्याणमोय गंगोपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
दोनों इस्तीफे ऐसे समय में आए हैं जब एक दिन पहले ही नई सरकार ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत आने वाले बोर्ड, स्वायत्त निकायों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त अध्यक्षों, सदस्यों और निदेशकों के कार्यकाल समाप्त करने का आदेश जारी किया था।
सिद्धार्थ मजूमदार को वर्ष 2022 में तत्कालीन सरकार की कैबिनेट ने स्कूल सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल जनवरी 2026 तक निर्धारित था, जिसे पहले बढ़ा दिया गया था।
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों के इस्तीफे संबंधित विभागीय कार्यालय तक पहुंच चुके हैं और आगे की प्रक्रिया जारी है।
पूर्व शासनकाल में शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। तत्कालीन शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व महासचिव पार्थ चटर्जी को जुलाई 2022 में शिक्षक भर्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह तीन वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहे और फिलहाल जमानत पर हैं, तथा इस बार उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।
इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा समानांतर रूप से की जा रही है। जांच के दौरान कई बोर्ड और निकायों से जुड़े प्रमुखों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि नई सरकार शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लगातार प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम उठा रही है।






.jpg)




.jpg)