न्यायपालिका
11 Apr, 2026

शिक्षक बर्खास्तगी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, विभागीय कार्रवाई पर सवाल

राजस्थान उच्च न्यायालय ने चित्तौड़गढ़ में तृतीय श्रेणी शिक्षक की बर्खास्तगी आदेश पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का हवाला देते हुए अंतरिम रोक लगाकर शिक्षा विभाग से जवाब तलब किया है।

जोधपुर, 11 अप्रैल।

राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने चित्तौड़गढ़ जिले के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, पारोली में तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में कार्यरत रामप्रसाद भारद्वाज की सेवा बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश 12 मार्च 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किया गया था।

जानकारी के अनुसार, रामप्रसाद भारद्वाज को स्वैच्छिक रूप से लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के आधार पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इस आदेश से आहत होकर उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की।

याचिका में तर्क दिया गया कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा राजस्थान सेवा नियमों में निर्धारित अनिवार्य प्रक्रिया की पूरी तरह अवहेलना करते हुए पारित किया गया है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि सेवा नियमों के अनुसार यदि कोई कर्मचारी एक माह से अधिक समय तक जानबूझकर अनुपस्थित रहता है तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जा सकती है, और दोष सिद्ध होने पर ही सेवा से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।

यह भी तर्क रखा गया कि इतनी गंभीर सजा देने से पहले राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत विभागीय जांच और सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में बिना अनुशासनात्मक प्रक्रिया अपनाए और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए सीधे बर्खास्तगी कर दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।

सभी तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं प्रतीत होती हैं। इसके बाद अदालत ने बर्खास्तगी आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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