स्लीपर बसों के बढ़ते नेटवर्क में अवैध हवाला और संदिग्ध पार्सल ढुलाई के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक नियंत्रण की गंभीर खामियां उजागर हो रही हैं।
12 मई।
मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में अंतरराज्यीय लग्जरी स्लीपर बसों का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। यात्रियों को सुविधा देने के नाम पर चल रही ये बसें अब केवल परिवहन का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि हवाला कारोबार, संदिग्ध पार्सल और अवैध माल ढुलाई का सुरक्षित माध्यम बनती दिखाई दे रही हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों ने परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में रायपुर में हंस ट्रेवल्स के कार्यालय से बोरियों में भारी मात्रा में हवाला के नोट मिलने की घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। इससे पहले इंदौर के राजेंद्र नगर क्षेत्र में नमकीन पैकेटों की आड़ में 1.30 करोड़ रुपए बरामद किए गए थे। यह केवल वे मामले हैं जो पकड़ में आ गए, लेकिन रोजाना चल रही सैकड़ों बसों में कितना अवैध सामान, नकदी, नशीले पदार्थ या संदिग्ध सामग्री भेजी जा रही है, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है।
आज अधिकांश लग्जरी बसों में यात्रियों के साथ नीचे बड़े-बड़े लगेज चैंबर बनाए जाते हैं। नियमों के अनुसार इनका उपयोग सीमित सामान रखने के लिए होना चाहिए, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। इन चैंबरों में बोरियों और बड़े पैकेटों में भारी मात्रा में माल भरकर भेजा जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन सामानों की न तो कोई स्कैनिंग होती है और न ही कोई सत्यापन।
यदि इस पूरे मामले में किसी विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी तय होती है, तो वह परिवहन विभाग है। बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और संचालन की जांच करने वाला विभाग यह क्यों नहीं देख पा रहा कि यात्री बसों का उपयोग खुलेआम मालवाहन के रूप में हो रहा है। वहीं, पुलिस की चेकिंग व्यवस्था भी अधिकांश स्थानों पर केवल औपचारिक बनकर रह गई है।
सरकार को चाहिए कि सभी अंतरराज्यीय स्लीपर बसों में पार्सल परिवहन के स्पष्ट नियम बनाए जाएं, हर पार्सल की डिजिटल एंट्री और प्रेषक की पहचान अनिवार्य की जाए तथा नियमित स्कैनिंग और जांच की व्यवस्था लागू हो। केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। अब समय आ गया है कि स्लीपर बसों की आड़ में चल रहे इस अवैध कारोबार पर सख्ती से रोक लगाई जाए।