रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने कहा है कि सोने पर आयात शुल्क में वृद्धि करने से आयात में कमी नहीं आती, बल्कि इससे कीमतों में और बढ़ोतरी होती है। परिषद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा की जाए।
परिषद के अनुसार, आयात शुल्क बढ़ाने का प्रभाव अक्सर अपेक्षित परिणाम नहीं देता और इससे सोने का आयात घटने के बजाय बाजार मूल्य में वृद्धि हो जाती है। हाल के वर्षों में सोने की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद आयात में समान अनुपात में कमी नहीं देखी गई है।
संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि अधिक शुल्क लगने से अवैध तस्करी को बढ़ावा मिलता है और निर्यात क्षेत्र की लागत भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही निर्यातकों को नामित एजेंसियों से शुल्क-मुक्त सोना खरीदने के लिए प्रति किलोग्राम भारी बैंक गारंटी देनी पड़ रही है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।
परिषद ने विशेष रूप से बताया कि इस स्थिति का सबसे अधिक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र के निर्माताओं पर पड़ रहा है, जहां पहले से ही नकदी प्रवाह की समस्या बनी हुई है। संगठन के अनुसार इसके लगभग अस्सी प्रतिशत सदस्य गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं।
हाल ही में सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा प्लैटिनम पर कर दर को भी बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। इस बदलाव का प्रभाव सोने और चांदी से बने डोरे, सिक्कों और अन्य वस्तुओं पर भी पड़ा है, जिससे पूरी मूल्य श्रृंखला प्रभावित हुई है।




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