कोलकाता, 06 जून।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी घमासान ने नया मोड़ ले लिया है। वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने उन विधायकों के हस्ताक्षर सार्वजनिक किए हैं, जिन्होंने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता चुने जाने का समर्थन किया था। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से उजागर कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, छह जून की शाम 30बी हरिश चटर्जी स्ट्रीट पर आयोजित बैठक में 67 विधानसभा सदस्य उपस्थित थे। शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ में उपस्थित सदस्यों के नाम, हस्ताक्षर, विधानसभा क्षेत्रों और तारीख का विवरण दर्ज है। इस बैठक की अध्यक्षता फिरहाद हकीम ने की थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्ष का नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक का चयन करना था। मदन मित्रा द्वारा शोभनदेव चट्टोपाध्याय को दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया था।
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब ऋतब्रत बनर्जी और सन्दीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को प्रस्तुत दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षरों का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच का कार्य सीआईडी (राज्य अपराध जांच विभाग) को सौंप दिया है, जो वर्तमान में चार विधायकों के हस्तलेख के नमूने एकत्र कर जांच कर रही है। इस बीच, ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित करने वाला एक और पत्र सामने आया है, जिसमें 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है।
राजनीतिक खींचतान के बीच दोनों शिकायतकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि वे जांच पूरी होने तक अधिक टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट और मोबाइल टावर लोकेशन से सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी। दूसरी ओर, असंतुष्ट विधायकों का दावा है कि बैठक के दौरान उपस्थिति और समर्थन पत्र के लिए अलग-अलग हस्ताक्षर लिए गए थे, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।









