नई दिल्ली, 11 जून।
ओडिशा में केंद्र सरकार की ‘जल संचय, जन भागीदारी’ पहल के तहत भूजल पुनर्भरण कार्यों का व्यापक विस्तार किया गया है। जाजपुर और कटक जिलों में बड़ी संख्या में रिचार्ज संरचनाएं और वर्षा जल संचयन प्रणालियां स्थापित कर जल संरक्षण को नई दिशा दी गई है।
जाजपुर जिले में 117 रिचार्ज शाफ्ट और 114 रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जबकि कटक में 57 हार्वेस्टिंग सिस्टम और 35 रिचार्ज शाफ्ट स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही राज्य में भूजल स्तर की वैज्ञानिक निगरानी के लिए 47 डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर, 72 ऑब्जर्वेशन वेल्स, 66 ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग स्टेशन और 100 अन्य अवलोकन कुओं का उपयोग किया जा रहा है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, वर्षा जल को संग्रहित कर रिचार्ज वेल्स और अन्य संरचनाओं के माध्यम से सीधे भूमिगत जल भंडार तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि तालाबों और टैंकों में बनाए गए ढांचे अतिरिक्त वर्षा जल को भूमि में समाहित करने में मदद कर रहे हैं, जिससे प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिल रहा है।
मंत्रालय ने बताया कि जाजपुर जिले में 2022-23 से 2025-26 के बीच किए गए प्रयासों से भूजल स्तर में सुधार देखा गया है और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी मजबूत हुई है।
इसी तरह कटक जिले में किए गए कार्यों के कारण भूजल दोहन का स्तर लगभग 47 प्रतिशत पर स्थिर बना हुआ है, जो संतुलित जल उपयोग और पुनर्भरण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम को दर्शाता है।
गंजम जिले के दिगपहंडी शहरी क्षेत्र में सरकारी भवनों, स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में भी रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे मानसून जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हुआ है और भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
मंत्रालय ने बताया कि तकनीकी उपायों के साथ-साथ समुदाय आधारित सहभागिता को भी बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, रैलियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें स्वयं सहायता समूहों, पंचायत प्रतिनिधियों, छात्रों और स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई है।
अधिकारियों के अनुसार यह पूरी पहल केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि एक जन आंदोलन का रूप ले रही है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ‘जल संचय, जन भागीदारी’ अभियान देश में जल संरक्षण का एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है।










