तेहरान, 16 जून।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते के 24 घंटे के भीतर ईरान ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि इजराइल भविष्य में लेबनान पर हमला करता है या वहां किसी भी क्षेत्र पर अपना कब्जा बनाए रखता है, तो इसे दोनों देशों के बीच हुए समझौते का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। तेहरान के इस रुख ने समझौते की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। वहीं, लेबनान के शीर्ष नेतृत्व ने भी बदलते क्षेत्रीय हालात पर विचार-विमर्श किया है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षक जल्द ही ईरान लौट सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि तेहरान के साथ जारी 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार का टोल नहीं लगाया जाएगा। ईरानी मीडिया का दावा है कि समुद्री प्रतिबंधों में ढील के बाद ईरान के तीन तेल टैंकर और दो मालवाहक जहाज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं।
उधर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी। जिनेवा में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि लेबनान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या कब्जे को तेहरान अपने समझौता ज्ञापन के उल्लंघन के रूप में देखेगा।
अरागची ने दोहराया कि ईरान और लेबनान को अलग-अलग मोर्चों के रूप में नहीं देखा जा सकता। उनका कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष में दोनों की सुरक्षा और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि तेहरान अपने सहयोगी हिजबुल्लाह के समर्थन से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है। दूसरी ओर, इजराइल पहले भी कई बार कह चुका है कि वह लेबनान के कुछ क्षेत्रों से अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त नहीं करेगा।
इस बीच ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ के 19 जून को जिनेवा में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच आगे की वार्ताओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। जेडी वेंस ने कहा कि समझौते का सबसे अहम पहलू यह है कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकना होगा। उन्होंने बताया कि कुछ तकनीकी पहलुओं पर अभी काम जारी है, इसलिए समझौते का पूरा विवरण औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही सार्वजनिक किया जाएगा।
वेंस ने यह भी बताया कि इस समझौते को अंतिम रूप देने में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उनके अनुसार, ईरान में परमाणु सामग्री के निरीक्षण की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस पर भी जिनेवा में निर्णय लिया जा सकता है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण के लिए भारी वित्तीय सहायता देने जा रहा है। ट्रंप ने ऐसी रिपोर्टों को भ्रामक बताते हुए पूरी तरह नकार दिया। हालांकि, इससे पहले यह चर्चा रही थी कि समझौते के तहत ईरान को पुनर्निर्माण सहायता मिल सकती है।
वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को वित्तीय सहायता की रूपरेखा प्रस्तुत करनी होगी। दूसरी ओर, जेडी वेंस ने पुनर्निर्माण फंड की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया और संकेत दिया कि इस दिशा में सहयोगी खाड़ी देश योगदान दे सकते हैं।
समझौते की घोषणा के बाद लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने आगामी सप्ताह वाशिंगटन में प्रस्तावित लेबनान-अमेरिका-इजराइल वार्ता के अगले चरण की तैयारियों पर भी चर्चा की। लेबनानी नेतृत्व ने इस समझौते को क्षेत्रीय तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
इस बीच तेल बाजार पर भी समझौते का असर दिखाई दिया है। गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली और सिटी जैसे प्रमुख निवेश बैंकों ने तेल कीमतों के अपने अनुमान घटा दिए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान 90 डॉलर से घटाकर 80 डॉलर कर दिया है। वहीं मॉर्गन स्टेनली ने भी अपने अनुमान में कटौती करते हुए उत्पादन और निर्यात की बहाली पहले की अपेक्षा अधिक तेजी से होने की संभावना जताई है।











