भोपाल, 01 जुलाई।
मध्य प्रदेश ने आपदा प्रबंधन को अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश का पहला जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन मॉडल विकसित करने की पहल की है। इसी क्रम में होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विभाग तथा यूएन वूमेन के बीच 'प्रवाह फेज-2' कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए भोपाल स्थित होमगार्ड मुख्यालय में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, यह एमओयू होमगार्ड महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की उपस्थिति में संपन्न हुआ। यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा और होमगार्ड एवं राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की ओर से उप पुलिस महानिरीक्षक अमित सांघी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
'प्रवाह फेज-2' का उद्देश्य आपदा प्रबंधन व्यवस्था में महिलाओं, बालिकाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए जेंडर संवेदनशील दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना है। इसके तहत पहले चरण में तैयार जेंडर रिस्पॉन्सिव डिजास्टर रिस्क रिडक्शन स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही मानसून और अन्य आपदाओं के दौरान इसके व्यावहारिक परिणामों का मूल्यांकन कर भविष्य के लिए और बेहतर रणनीति तैयार की जाएगी।
होमगार्ड महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने आपदा प्रबंधन में महिलाओं की आवश्यकताओं और सहभागिता को ध्यान में रखते हुए विशेष एसओपी तैयार की है। यह एसओपी राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों के दौरान रेस्क्यू टीमों को अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी ढंग से कार्य करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा ने कहा कि आपदाओं का प्रभाव महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों पर अधिक पड़ता है। ऐसे में जेंडर संवेदनशील आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने विश्वास जताया कि मध्य प्रदेश की यह पहल राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल साबित होगी।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 'प्रवाह फेज-2' के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्यों में महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा, सहभागिता और विशेष आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली अधिक नागरिक-केंद्रित और प्रभावी बन सकेगी।



















