भोपाल, 04 जुलाई।
भोपाल। पूर्व मिस पूणे और मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मई 2026 में भोपाल स्थित ससुराल में हुई उनकी मौत की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। पांच माह पहले ही विवाह बंधन में बंधी ट्विशा की मौत को लेकर मायके और ससुराल पक्ष के अलग-अलग दावों के बीच जांच एजेंसी हर पहलू की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच कर रही है। मामले में पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम निष्कर्ष और गवाहों के बयानों का मिलान कर रही है।
ट्विशा शर्मा का विवाह दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुआ था। 12 मई 2026 को उनका शव ससुराल में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में मौत का कारण लिगेचर के माध्यम से फांसी बताया गया, लेकिन मायके पक्ष ने इसे दहेज उत्पीड़न और हत्या का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार का आरोप है कि विवाह के बाद से ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था तथा उन पर गर्भ समाप्त करने का भी दबाव बनाया गया। वहीं आरोपी पक्ष ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे आत्महत्या का मामला बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया। दोनों फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी उनके बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित लिगेचर यानी नायलॉन बेल्ट है, जिसके जरिए फांसी लगाए जाने की बात सामने आई है। CBI इस बेल्ट की जब्ती प्रक्रिया, उसकी चेन ऑफ कस्टडी और फॉरेंसिक परीक्षण की विस्तार से जांच कर रही है। परिवार ने आरोप लगाया है कि बेल्ट की जब्ती में गंभीर अनियमितताएं हुईं और सबूत से छेड़छाड़ की आशंका है। बताया गया है कि जब्ती मेमो पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर नहीं हैं। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, फॉरेंसिक विशेषज्ञ लिगेचर बेल्ट का फाइबर विश्लेषण, डीएनए परीक्षण, फिंगरप्रिंट, टच डीएनए और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण कर रहे हैं। बेल्ट के रेशों का मृतका के कपड़ों, त्वचा और गले पर बने निशानों से मिलान किया जा रहा है। यदि वैज्ञानिक जांच में किसी प्रकार की असंगति या छेड़छाड़ सामने आती है तो इससे मामले की दिशा प्रभावित हो सकती है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
मामले में दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्टों में फांसी से मौत की पुष्टि के साथ शरीर पर अन्य चोटों का भी उल्लेख होने की बात सामने आई है। CBI इन चोटों की प्रकृति, समय और परिस्थितियों का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे मौत से पहले लगी थीं या बाद की हैं तथा उनका घटना से क्या संबंध है।
जांच एजेंसी मोबाइल फोन, चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, ई-मेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है। परिवार की ओर से उपलब्ध कराए गए ऑडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सत्यता का भी परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही समर्थ सिंह के कथित रूप से फरार रहने के दौरान उन्हें शरण देने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जून के अंतिम सप्ताह में गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित घर में चोरी की घटना भी जांच का हिस्सा बनी हुई है। इस घटना में दस्तावेज, रिवॉल्वर और अन्य सामान चोरी होने की जानकारी सामने आई थी। CBI यह भी जांच कर रही है कि इस घटना का मूल प्रकरण से कोई संबंध है या नहीं तथा कहीं इसका उद्देश्य साक्ष्यों को प्रभावित करना तो नहीं था।
इस मामले में जांच के शुरुआती चरण में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। विशेष रूप से घटनास्थल से बरामद सामग्री की जब्ती और संरक्षण को लेकर उठे आरोपों की CBI स्वतंत्र रूप से समीक्षा कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी वैज्ञानिक रिपोर्ट, फॉरेंसिक निष्कर्ष, गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों का समग्र विश्लेषण करने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जांच जारी है। ऐसे में दहेज उत्पीड़न, हत्या, आत्महत्या अथवा साक्ष्यों से छेड़छाड़ जैसे सभी पहलुओं की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। CBI ने संकेत दिए हैं कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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CBI हर पहलू की बारीकी से कर रही जांच
मामले की जांच कर रही CBI ने इसे केवल दहेज मृत्यु या आत्महत्या के नजरिए से नहीं, बल्कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया है। जांच एजेंसी वैज्ञानिक, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का मिलान कर हर बिंदु की अलग-अलग पड़ताल कर रही है।
इन बिंदुओं पर है CBI का फोकस
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लिगेचर (नायलॉन बेल्ट) की फॉरेंसिक जांच : बेल्ट के फाइबर, डीएनए, फिंगरप्रिंट और टच डीएनए की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि उसका इस्तेमाल कैसे हुआ और क्या उससे किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई।
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चेन ऑफ कस्टडी की पड़ताल : घटनास्थल से बरामद लिगेचर और अन्य साक्ष्यों की जब्ती, सीलिंग और सुरक्षित रखे जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सबूतों से किसी स्तर पर छेड़छाड़ तो नहीं हुई।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट का विश्लेषण : दोनों पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटों, लिगेचर मार्क और मौत के कारण का विशेषज्ञों की मदद से अध्ययन किया जा रहा है।
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डिजिटल साक्ष्यों की जांच : मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट, ई-मेल, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण कर घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार की जा रही है।
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ऑडियो और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का सत्यापन : मृतका के परिजनों द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑडियो क्लिप और अन्य डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच कर उनकी प्रमाणिकता की पुष्टि की जा रही है।
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दहेज उत्पीड़न के आरोप : परिजनों के आरोपों, गवाहों के बयान और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान कर यह देखा जा रहा है कि उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।
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आत्महत्या या हत्या का एंगल : वैज्ञानिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल की परिस्थितियों के आधार पर यह जांच की जा रही है कि मामला आत्महत्या का है या किसी अन्य अपराध का।
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फरारी के दौरान मदद करने वालों की भूमिका : आरोपी को कथित रूप से शरण देने वाले लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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घटनास्थल पर हुई चोरी की जांच : आरोपी पक्ष के घर में हुई चोरी और उसमें गायब हुए दस्तावेजों व अन्य सामान का मूल मामले से कोई संबंध है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
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गवाहों और पुलिस कार्रवाई की समीक्षा : शुरुआती जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई, साक्ष्य संकलन और गवाहों के बयानों का भी परीक्षण किया जा रहा है।
CBI का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयानों का मिलान पूरा होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई और अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
















