कोलकाता, 06 जुलाई।
पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के अवसर पर विभिन्न स्मारक और शैक्षिक परियोजनाओं के लिए 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की घोषणा की गई है। साथ ही अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में उनके जीवन, राष्ट्र निर्माण में योगदान और पश्चिम बंगाल के गठन में निभाई गई भूमिका को शामिल करने की बात कही गई।
यह घोषणा भवानीपुर स्थित मित्रा इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1906 से 1917 तक इसी विद्यालय में अध्ययन किया था। इसके बाद वर्ष 1924 से 1938 तक वह विद्यालय की प्रबंधन समिति के सदस्य भी रहे।
कार्यक्रम में कहा गया कि नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में योगदान से परिचित कराना आवश्यक है। उनके राष्ट्रवादी विचारों, विधानसभा में दिए गए भाषणों, स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उनकी भूमिका और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहते किए गए कार्यों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।
समारोह के दौरान मित्रा इंस्टीट्यूशन के संरक्षण और आधुनिकीकरण से जुड़ी कई घोषणाएं भी की गईं। विद्यालय भवन के जीर्णोद्धार के लिए विधायक क्षेत्र विकास निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा की गई। साथ ही कोलकाता नगर निगम आयुक्त को अगस्त तक अभियंताओं की टीम भेजकर संरक्षण और पुनरुद्धार की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यालय की ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रखी जा सके।
इसके अलावा शिक्षा विभाग को विद्यालय को पीएम स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया योजना के अंतर्गत लाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से संचालित केंद्र सरकार की एक अन्य शैक्षणिक पहल से विद्यालय को जोड़ने की संभावनाएं तलाशने के लिए भी कहा गया।
बताया गया कि सूचना एवं संस्कृति विभाग चालू वित्त वर्ष में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में करीब 200 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाएं संचालित करेगा। इनमें उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा के निर्माण सहित अन्य स्मारक परियोजनाएं शामिल हैं। अधिकारियों से यह भी विचार करने को कहा गया कि इस राशि का एक हिस्सा मित्रा इंस्टीट्यूशन के विकास कार्यों पर भी खर्च किया जा सकता है।
विद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान उन्हें राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया। कहा गया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, स्वामी विवेकानंद की तरह भारत माता को सर्वोच्च आदर्श मानते थे। विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालय के एक हजार छात्रों को सिस्टर निवेदिता की प्रसिद्ध पुस्तक "द मास्टर ऐज़ आई सॉ हिम" की निःशुल्क प्रतियां उपलब्ध कराने की भी घोषणा की गई।
इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि पूर्ववर्ती वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को अपेक्षित महत्व नहीं दिया। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी को उनके जीवन, शिक्षा, उद्योग और राष्ट्रीय एकता के लिए किए गए कार्यों की जानकारी मिल सकेगी।



















