नई दिल्ली, 06 जुलाई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने चुनावी एजेंडे और संगठनात्मक रणनीति को स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि आगामी चुनाव में सामाजिक न्याय, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, दलित उत्पीड़न, शिक्षा और छात्र हित जैसे विषय कांग्रेस के प्रमुख मुद्दे रहेंगे। उन्होंने बताया कि संगठन को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बूथ स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया जा रहा है और जल्द ही गांव-गांव में कांग्रेस की सक्रिय उपस्थिति दिखाई देगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पारंपरिक जनाधार दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, ब्राह्मण और गरीब वर्ग रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य इन वर्गों को फिर से अपने साथ जोड़ना है। इसके लिए प्रदेशभर में जनसंवाद अभियान चलाया जाएगा। किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के आधार पर चुनावी घोषणा पत्र तैयार किया जाएगा।
सपा के साथ गठबंधन के सवाल पर गौतम ने कहा कि दोनों दल सहयोगी हैं और सीटों के बंटवारे को लेकर किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। उनके अनुसार राजनीतिक परिपक्वता के साथ सम्मानजनक और बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए समझौता किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी पर निर्भर नहीं है, लेकिन गठबंधन को मजबूत बनाए रखने की पक्षधर है।
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि पूरी व्यवस्था पारदर्शी थी तो इतनी बड़ी घटना कैसे हुई। उनके मुताबिक ट्रस्ट और उससे जुड़े लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत किया गया था, इसलिए भाजपा इस विवाद से स्वयं को अलग नहीं कर सकती। उनका आरोप था कि इस मामले में आस्था का इस्तेमाल राजनीति और सत्ता हासिल करने के लिए किया गया।
पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य लगातार संकट में पड़ रहा है। कांग्रेस इन मुद्दों को गांवों, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों तक लेकर जाएगी। उनका आरोप था कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में कांग्रेस का सबसे प्रमुख एजेंडा सामाजिक न्याय रहेगा। इसके तहत बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, दलित छात्रों की छात्रवृत्ति, किसानों की आय, गन्ना किसानों के बकाया और वंचित वर्गों के अधिकार जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का खर्च इतना बढ़ गया है कि गरीब परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना कठिन होता जा रहा है।
दलित राजनीति और बसपा के घटते जनाधार पर उन्होंने कहा कि जनता किसी भी दल की स्थायी मतदाता नहीं होती और लोग अपने हितों व प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि दलितों, पिछड़ों और गरीबों के हित में सबसे अधिक कार्य कांग्रेस ने किए हैं। आरक्षण, छात्रवृत्ति, बैंक राष्ट्रीयकरण, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून, सूचना का अधिकार, मनरेगा और खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सबसे बड़ी चुनौती संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है। सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले सभी लोगों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उनका कहना था कि भाजपा का प्रभावी मुकाबला करने के लिए व्यापक विपक्षी एकता जरूरी है और क्षेत्रीय दल अकेले पर्याप्त चुनौती नहीं दे सकते।
लोकसभा सीटों के परिसीमन और संभावित संवैधानिक संशोधन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि संविधान की मूल भावना या संघीय ढांचे को प्रभावित करने वाले किसी भी कदम का कांग्रेस विरोध करेगी। उन्होंने आशंका जताई कि परिसीमन प्रक्रिया का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग किया जा सकता है और पार्टी इस मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाएगी।
एसआईआर और चुनाव आयोग की भूमिका पर उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के समर्थन में है और इस विषय पर लोगों को जागरूक करेगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है।
अंत में उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है और लोगों का भरोसा पार्टी की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी।



















