कानपुर, 10 जुलाई।
साई वज्र अभियान के तहत कानपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से मोबाइल फोन, बैंकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, फर्म से जुड़े अभिलेख और एक कार बरामद की है। प्रारंभिक जांच में करीब एक करोड़ 90 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है।
एडीसीपी साइबर क्राइम अंजली विश्वकर्मा ने शुक्रवार को बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मंगल सिंह, विजेंद्र यादव, अबी वकास और राहुल शर्मा के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह बड़ी लिमिट वाले बैंक खातों और कॉरपोरेट फर्मों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम देता था। आरोपितों ने अखिलेश गुप्ता को उनकी पत्नी अंजिता गुप्ता के नाम पर पांच करोड़ रुपये का दान दिलाने का झांसा दिया था। इसके लिए नोमान फारुखी ने उनसे संपर्क कर स्कूल भवन निर्माण के लिए डोनेशन दिलाने की बात कही। आठ से 14 मार्च के बीच बंधन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के खातों के जरिए कुल एक करोड़ 90 लाख रुपये का लेनदेन कराया गया। इस दौरान पीड़ित का सिम कार्ड भी बदल दिया गया।
पुलिस के अनुसार, गिरोह पहले लोगों को बैंक लोन, व्यापारिक सहायता या बड़ी राशि का दान दिलाने का भरोसा देकर विश्वास में लेता था। इसके बाद उनके बैंक खाते, सिम कार्ड और जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर एपीके फाइल और अन्य तकनीकी माध्यमों से बैंक खातों का एक्सेस नेटवर्क के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराया जाता था। ठगी की रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर पुलिस की निगरानी से बचने का प्रयास किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि मंगल सिंह ने "अपराजिता ट्रेडर्स" के नाम से फर्म बनाकर फर्जी वित्तीय लेनदेन किए।
डिजिटल जांच के दौरान आरोपितों के मोबाइल फोन से बैंक खातों का विवरण, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां, चेकबुक, पासबुक, क्यूआर कोड, लॉगिन आईडी, पासवर्ड, एपीके लिंक, वॉइस रिकॉर्डिंग और साइबर ठगी से जुड़े व्हाट्सएप चैट बरामद हुए हैं।
पुलिस का कहना है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के साथ पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है। लखनऊ और सिलीगुड़ी से भी लेनदेन किए गए हैं, जबकि राहुल शर्मा के मोबाइल से 12 अन्य बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनकी जांच जारी है। आरोपितों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, छह चेकबुक, चार पासबुक, चार एटीएम कार्ड, एक टैक्स इनवॉइस बुक, नौ लेटरहेड, एक फर्म की मोहर और एक कार बरामद की गई है।
बरामद डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, सिम कार्ड, ओटीपी, इंटरनेट बैंकिंग या अन्य वित्तीय जानकारी साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।












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