गया, 16 जुलाई।
ग्रामीण विकास मंत्रालय और बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) के संयुक्त तत्वावधान में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बीपार्ड) में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन 6 करोड़ लखपति दीदी मिशन के लिए राष्ट्रीय रणनीति, रोडमैप और वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना तैयार करने के साथ हुआ। कार्यशाला में कृषि, गैर-कृषि आजीविका और एमआईएस को केंद्र में रखकर व्यापक मंथन किया गया।
कार्यशाला को ऑनलाइन संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने राष्ट्रीय लक्ष्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में बिहार सरकार के प्रधान सचिव पंकज कुमार, बीपार्ड की अपर महानिदेशक डॉ. सफीना ए. एन., ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा, जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह, अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी संगीता यिरंग, ग्रामीण विकास मंत्रालय की निदेशक राजेश्वरी एस. एम., गेट्स फाउंडेशन के अंजनी कुमार सिंह सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और विकास सहयोगी संस्थाओं के सदस्य मौजूद रहे।
दो दिनों तक चली चर्चा में कृषि, गैर-कृषि आजीविका, उद्यमिता संवर्द्धन, अभिसरण, डिजिटल एमआईएस और महिलाओं की आय बढ़ाने की दीर्घकालिक रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। पहले दिन आयोजित तीन समानांतर तकनीकी सत्रों में राज्यों ने अपने सफल मॉडल, अनुभव और चुनौतियां साझा कीं। इन्हीं सुझावों के आधार पर दूसरे दिन आगामी पांच वर्षों की रणनीति और वर्ष 2026-27 की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई।
उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण, ज्ञान साझेदारी, संस्थागत विकास, क्षमता निर्माण और बाजार आधारित आजीविका को मिशन की सफलता का आधार बताया। पंकज कुमार ने कहा कि नवाचार, अभिसरण और बाजारोन्मुखी गतिविधियां इस अभियान को गति देंगी। वहीं डॉ. सफीना ए. एन. ने सतत प्रशिक्षण और संस्थागत मजबूती की आवश्यकता पर बल दिया।
दूसरे दिन पहले दिन की अनुशंसाओं की समीक्षा की गई। इसके बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय के उप निदेशक रमन वाधवा और राष्ट्रीय मिशन प्रबंधन इकाई की टीम ने कृषि एवं गैर-कृषि आजीविका से जुड़ी पांच वर्षीय रणनीति, नीति सुधार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण का खाका प्रस्तुत किया। एमआईएस रणनीति पर शांतनु बोही और टीम ने डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, रीयल टाइम मॉनिटरिंग तथा राज्यों के बीच डेटा एकीकरण की रूपरेखा रखी।
कार्यशाला के दौरान ग्रामीण विकास विषयक पुस्तक “फॉस्टरिंग पाथवेज फॉर रूरल ट्रांसफॉर्मेशन” का लोकार्पण किया गया। साथ ही बिहार जीविका और अरुणाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच ज्ञान साझेदारी एवं संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने और सामुदायिक संस्थाओं को मजबूत करने में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि अगले चरण में उद्यम विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, डिजिटल प्लेटफॉर्म, बाजार संपर्क, जलवायु अनुकूल आजीविका और अभिसरण आधारित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने लखपति दीदियों के क्षमता विकास के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई।
स्वाति शर्मा ने ‘6 करोड़ लखपति दीदी’ अभियान की रणनीति पर प्रस्तुति देते हुए बताया कि 3 करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य से प्राप्त अनुभवों को आधार बनाकर आगे की कार्ययोजना तैयार की गई है। सचिव रोहित कंसल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक संस्थाओं और राज्यों के साझा प्रयासों से पूर्व लक्ष्य हासिल हुआ है तथा तकनीक, वित्तीय समावेशन, नवाचार, बाजार आधारित उद्यम और अभिसरण के माध्यम से नया लक्ष्य भी निर्धारित समय में पूरा किया जाएगा। उन्होंने अपने संबोधन का समापन मैथिलीशरण गुप्त की कविता की पंक्तियों के उल्लेख के साथ किया।
समापन सत्र में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने कृषि, गैर-कृषि और एमआईएस से जुड़ी अनुशंसाओं का समेकन करते हुए अगले पांच वर्षों की साझा कार्ययोजना, प्राथमिकताओं और समयबद्ध क्रियान्वयन पर सहमति व्यक्त की। साथ ही लखपति दीदी डैशबोर्ड के नियमित उपयोग, आवश्यक ऐप्स पर पुनः प्रशिक्षण तथा महिलाओं की आय वृद्धि, टिकाऊ आजीविका, डिजिटल नवाचार और सामुदायिक संस्थाओं को सशक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।














