नई दिल्ली, 16 जुलाई।
भारतीय नौसेना 22 जुलाई को माहे श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) वर्ग के दूसरे जहाज ‘मालवन’ को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में देश की बढ़ती निर्माण क्षमता का प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है।
युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने के समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह करेंगे। इस अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान के फ़्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन, भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहेंगे।
कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में निर्मित ‘मालवन’ आधुनिक युद्धपोत डिजाइन और निर्माण क्षमता में भारत की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आकार में अपेक्षाकृत छोटा होने के बावजूद यह युद्धपोत आधुनिक तकनीक और बहुउद्देशीय क्षमताओं से लैस है। इसकी उच्च गतिशीलता, सटीक परिचालन क्षमता और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहने की विशेषता इसे उथले जल क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियान के लिए प्रभावी बनाती है।
भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘मालवन’ का शामिल होना नई पीढ़ी के स्वदेशी पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोतों की श्रृंखला को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे नौसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।













