कानपुर, 16 जुलाई।
जनपद में अब जलभराव वाली जमीन भी किसानों की आय बढ़ाने का जरिया बनेगी। उद्यान विभाग ने मखाना की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजना शुरू की है। इसके तहत निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों के किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि जहां पारंपरिक फसलें बेहतर परिणाम नहीं देतीं, वहां मखाना लाभदायक विकल्प बन सकता है।
मखाना की खेती पानी में उसी प्रकार की जाती है, जैसे सिंघाड़े की खेती होती है। इसकी बुवाई नवंबर-दिसंबर में की जाती है और फसल तैयार होने में लगभग सात से आठ महीने का समय लगता है। बाजार में लगातार मांग और बेहतर दाम मिलने से यह किसानों के लिए लाभकारी नकदी फसल के रूप में उभर रही है।
योजना के तहत तालाब में मखाना की खेती की लागत प्रति हेक्टेयर लगभग एक लाख 79 हजार रुपये तथा उथले खेतों में एक लाख 32 हजार रुपये निर्धारित की गई है। इस पर किसानों को 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। वहीं मखाना प्रोसेसिंग इकाई स्थापित करने पर 35 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा, जिससे मूल्य संवर्धन के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जा सके।
चालू वित्तीय वर्ष में जनपद को 30 हेक्टेयर में मखाना खेती का लक्ष्य दिया गया है। इसके तहत तालाबों में सामान्य वर्ग के लिए तीन हेक्टेयर और अनुसूचित जाति के लिए दो हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। उथले खेतों में सामान्य वर्ग के लिए 17 हेक्टेयर, अनुसूचित जाति के लिए सात हेक्टेयर तथा अनुसूचित जनजाति के लिए एक हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। इसके अलावा चार अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, 50 तुड़ाई उपकरणों के वितरण और 100 किसानों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य भी रखा गया है।
उद्यान विभाग का कहना है कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अधिक आय देने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जलभराव वाले क्षेत्रों के किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इच्छुक किसान जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास तालाब, उथला खेत या जलभराव वाले खेत की खतौनी होना आवश्यक है। विभाग की ओर से इच्छुक किसानों को निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।














