नई दिल्ली, 16 जुलाई।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अगले दो वर्षों में देशभर में 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में जलवायु अनुकूल खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल, जल एवं मृदा संरक्षण तथा जोखिम कम करने वाले व्यावहारिक उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि बदलते मौसम की परिस्थितियों में भी किसानों को सुरक्षित और लाभकारी खेती का अवसर मिल सके।
गुरुवार को पूसा में आईसीएआर की 100वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने मंत्रालय का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अगले दो वर्षों में “वन इंस्टीट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन” के तहत प्रत्येक संस्थान से कम से कम एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक या समाधान विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव हो। इसमें नई फसल किस्में, वैक्सीन, डिजिटल उपकरण और क्लाइमेट स्मार्ट खेती जैसे नवाचार शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि आईसीएआर का लक्ष्य अपनी 100वीं वर्षगांठ तक कम से कम 10 करोड़ किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचारों और आधुनिक कृषि समाधानों को पहुंचाना है। इसके लिए स्थापना दिवस को किसानों के बीच मनाने की योजना बनाई जाएगी। प्रत्येक किसान विकास केंद्र कम से कम 100 गांवों में पहुंचकर अपनी अनुसंधान उपलब्धियों और तकनीकों का प्रदर्शन करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को नकली और घटिया बीज तथा कीटनाशकों से बचाने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से ऐसे सरल उपकरण और तकनीक विकसित करने का आग्रह किया, जिनकी मदद से खेत पर ही बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता की तुरंत जांच की जा सके, जिससे किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने एफएमडी सहित अन्य गंभीर पशु रोगों पर नियंत्रण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वैक्सीन, नई किस्मों और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बीज, उर्वरक और पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना आवश्यक है। साथ ही 70 से अधिक एमओयू और प्रौद्योगिकी लाइसेंसिंग समझौतों के जरिए इन तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप के सहयोग से तेजी से किसानों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा।













