भोपाल, 17 जुलाई।
मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में मितव्ययिता और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए सख्त कॉस्ट कटिंग नीति लागू कर दी है। वित्त विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी सरकारी विभागों, निगमों, मंडलों, सार्वजनिक उपक्रमों और विश्वविद्यालयों में फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार के खर्च पर होने वाली अधिकांश विदेश यात्राओं पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है। इसके अलावा नए साल या अन्य अवसरों पर महंगे सरकारी कैलेंडर, डायरी, वीआईपी उपहार और स्वागत समारोहों पर होने वाले खर्च भी प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। अधिकारियों के लिए सरकारी कार्यों में केवल इकोनॉमी क्लास में यात्रा की अनुमति होगी।
सरकार ने महंगे होटलों और व्यावसायिक केंद्रों में आयोजित कार्यशालाओं, बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी रोक लगा दी है। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे कार्यक्रम शासकीय भवनों में आयोजित किए जाएं या फिर वर्चुअल माध्यम और वेबिनार का उपयोग किया जाए। कार्यालयों की गैर-जरूरी साज-सज्जा पर होने वाले खर्च को भी सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन व्यवस्था में भी बदलाव करते हुए व्हीकल पूलिंग नीति को अनिवार्य किया गया है। अतिरिक्त प्रभार मिलने की स्थिति में संबंधित वाहन का उपयोग अन्य पात्र अधिकारियों के लिए किया जाएगा, ताकि किराए के वाहनों पर होने वाला खर्च कम किया जा सके। विभागाध्यक्षों को अनुबंधित वाहनों की संख्या सीमित रखने और एक वाहन का उपयोग दो या अधिक अधिकारियों के बीच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंधों पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही सभी निगमों, मंडलों और सार्वजनिक उपक्रमों को अधिकतम संभव लाभांश राज्य सरकार के खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
सरकार का मानना है कि इन उपायों से वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और बचाई गई राशि को बुनियादी ढांचे तथा जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकेगा।













