शिमला, 17 जुलाई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित 500 करोड़ रुपये के क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार इस कथित धोखाधड़ी से 2.48 लाख से अधिक निवेशक प्रभावित हुए हैं। गिरफ्तार आरोपितों में मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा शामिल हैं। विशेष पीएमएलए अदालत ने तीनों को 12 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।
ईडी के अनुसार जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। आरोप है कि आरोपितों ने कोर्वियो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे कथित फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म तैयार कर लोगों को अधिक और निश्चित मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया।
जांच एजेंसी के मुताबिक वर्ष 2018 में मुख्य आरोपित सुभाष शर्मा ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्रिप्टोकरेंसी आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना शुरू की। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किए गए, जिन्हें बाद में विदेशी सर्वरों पर संचालित किया गया। आरोप है कि निवेशकों को कोर्वियो कॉइन में निवेश के बदले ऊंचे और तय रिटर्न का भरोसा दिया गया तथा पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाई गई राशि से किया जाता था।
ईडी का दावा है कि जांच के दौरान 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेनदेन का पता चला है और निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। एजेंसी के अनुसार डिजिटल रिकॉर्ड और डोमेन से जुड़ा डाटा भी कथित रूप से मिटाने का प्रयास किया गया था, लेकिन बरामद डिजिटल साक्ष्यों से पूरे नेटवर्क के संचालन के संकेत मिले हैं।
जांच में मिलन गर्ग को नेटवर्क का तकनीकी विशेषज्ञ और प्रमुख संचालकों में से एक बताया गया है। वहीं सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा पर निवेशकों को जोड़ने, धन एकत्र करने और कथित अपराध से अर्जित राशि के लेनदेन में भूमिका निभाने का आरोप है। एजेंसी इन आरोपों की जांच कर रही है।
ईडी ने बताया कि इस मामले में इससे पहले हेम राज और माशूम जूनेजा को भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुख्य आरोपित सुभाष शर्मा फिलहाल फरार है। एजेंसी अब कथित अपराध से अर्जित धन और उसे वैध बनाने के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।














