भुवनेश्वर, 16 जुलाई।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच भी श्रीजगन्नाथ रथयात्रा का उत्साह और श्रद्धा चरम पर रही। विश्व प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा 2026 में ओडिशा सहित देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने वर्षा की परवाह किए बिना भगवान के दर्शन कर आस्था का परिचय दिया।
15 जुलाई की शाम से शुरू हुई बारिश रथयात्रा के दिन भी जारी रही। पुरी और तटीय ओडिशा के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी, लेकिन इसका असर श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था पर नहीं पड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बड़दांड (ग्रैंड रोड) पर एकत्र होकर रथयात्रा के साक्षी बने।
सुबह से ही भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरे मार्ग पर "जय जगन्नाथ" और "हरिबोल" के जयघोष गूंजते रहे, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं और कलाकारों का उत्साह देखने लायक रहा। भीगी सड़कों पर विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां दीं। विशेष रूप से ओडिसी नृत्यांगनाओं ने वर्षा और जलभराव के बीच अपनी प्रस्तुति देकर भगवान के प्रति समर्पण का भाव व्यक्त किया।
जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा से जुड़े सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुए। सुबह भोग मंडप में धूप अनुष्ठान के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके बाद देव विग्रहों और रथों की तैयारी से जुड़े सभी धार्मिक विधान पूरे किए गए।
पहंडी बीजे अनुष्ठान के तहत भगवानों को गर्भगृह से बाहर लाकर घंटा, काहली और तेलिंगी बाजा की ध्वनि के बीच शोभायात्रा के साथ रथों पर विराजमान कराया गया। भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष, भगवान बलभद्र के तालध्वज और देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ को परंपरा के अनुसार सजाया गया।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने भी रथों पर विराजमान चतुर्धामूर्ति के दर्शन किए। इसके बाद पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने पारंपरिक छेरा पहंरा अनुष्ठान संपन्न किया। श्वेत वस्त्र धारण कर रजत जड़ित पालकी में पहुंचे गजपति महाराजा ने स्वर्ण झाड़ू से रथों की सफाई की तथा वैदिक मंत्रोच्चार, पुष्प अर्पण और सुगंधित जल के छिड़काव के साथ अनुष्ठान पूरा किया। यह परंपरा भगवान के समक्ष सभी के समान होने का संदेश देती है।
अनुष्ठानों के बाद रथ खींचने की प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ, फिर देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ श्रद्धालुओं ने खींचा। समय अधिक होने के कारण तीनों रथ गुरुवार को मौसी मां मंदिर तक नहीं पहुंच सके। अब शुक्रवार सुबह आगे की यात्रा पूरी की जाएगी।
आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे। करीब 13 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी, जिनमें राज्य पुलिस, केंद्रीय बल, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के जवान शामिल रहे। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए विशेष प्रबंध किए गए, जिससे रथयात्रा का संचालन सुचारु रूप से संपन्न हो सका।














