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16 Jul, 2026

आईसीएआर ने एक वर्ष में विकसित कीं 386 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में

आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पिछले एक वर्ष में 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की गईं, जिनमें 94 प्रतिशत जलवायु-अनुकूल हैं।

नई दिल्ली, 16 जुलाई।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें 94 प्रतिशत जलवायु-अनुकूल और 29 जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) किस्में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसके मस्तिष्क हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 1928 में स्थापित आईसीएआर ने पिछले 98 वर्षों में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार व्यवस्था को मजबूत करने, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों ने खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध तथा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। साथ ही मांग आधारित अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल कृषि, दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से नवाचारों के व्यापक प्रसार पर विशेष जोर दिया।

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से नई तकनीकों और अनुसंधान को तेजी से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हुए एमओयू से अनुसंधान और तकनीक हस्तांतरण को नई गति मिलेगी।

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र में हुई प्रगति सरकार की किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने प्राकृतिक खेती, विज्ञान आधारित अनुसंधान और किसान-केंद्रित नवाचारों को समय की आवश्यकता बताया। राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर बल दिया।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ। इसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55 हजार करोड़ रुपये रहा। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक तकनीकें सीधे लगभग एक करोड़ किसानों और मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचीं।

समारोह में 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देकर उनकी सेवाएं नियमित की गईं। आईसीएआर ने 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए, ताकि विकसित तकनीकों का व्यावसायीकरण और किसानों तक उनका तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।

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