नई दिल्ली, 27 जुलाई।
गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोमवार को पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अपनी पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
पत्रकारों से बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बाद वह बापू के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहते थे। उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल सभी देशवासियों का धन्यवाद देते हुए कहा कि महात्मा गांधी द्वारा दिखाया गया मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 100 वर्ष पहले था। उन्होंने कहा कि अपने संकल्प को पूरा करने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपील करनी चाहिए।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और देश में सार्थक बदलाव की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ संवाद और आपसी सम्मान के माध्यम से ही सही निष्कर्ष तक पहुंचा जा सकता है। बेहतर विचार-विमर्श के बाद देश को वही व्यवस्था अपनानी चाहिए, जो उसके लिए सबसे उपयुक्त हो।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब 37 दिनों तक चले सीजेपी के छात्र आंदोलन के दौरान 26 दिनों तक अनशन किया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां से सोमवार को उन्हें छुट्टी मिल गई।
यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। इसके बाद बीते शनिवार को उन्होंने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही सीजेपी ने भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की भी मांग की थी। संगठन का कहना है कि इस संबंध में सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है।

















