करामोजा, 27 जुलाई।
युगांडा के करामोजा क्षेत्र में लंबे समय से पड़े सूखे ने गंभीर खाद्य संकट पैदा कर दिया है। भूख से 19 लोगों की मौत के बाद सरकार ने आपातकालीन राहत अभियान शुरू कर दिया है। लगातार बारिश नहीं होने से फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे इस क्षेत्र की करीब 15 लाख आबादी खाद्य कमी और बढ़ते कुपोषण की समस्या से जूझ रही है।
वैश्विक खाद्य सुरक्षा निगरानी नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, करामोजा में स्थिति संकट के स्तर तक पहुंच गई है। विदेशी सहायता में कमी के कारण पैदा हुए वित्तीय दबाव के बीच युगांडा सरकार ने पहली बार बड़े पैमाने पर राहत वितरण अभियान शुरू किया है। सरकार ने बताया कि अगले दो महीनों में 9,400 टन राहत खाद्य सामग्री वितरित की जाएगी। इसके लिए संसद से मंजूर 45 अरब शिलिंग के आपातकालीन कोष से खाद्य सामग्री खरीदी गई है।
आपदा प्रबंधन और शरणार्थी मामलों के मंत्री सैम एंगोला ने काबोंग जिले के लोडिको उप-काउंटी स्थित एक प्राथमिक विद्यालय से राहत वितरण अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति नहीं चाहते कि करामोजा में किसी भी व्यक्ति की मौत भूख से हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत वितरण की निगरानी की जाएगी और प्रत्येक जरूरतमंद तक भोजन पहुंचाया जाएगा।
स्वास्थ्य केंद्रों के अनुसार, क्षेत्र में सैकड़ों बच्चों का गंभीर कुपोषण के कारण उपचार चल रहा है। जून में जारी पोषण रिपोर्ट में बताया गया था कि करामोजा के काबोंग और कोटिडो जिलों की लगभग आधी आबादी संकट की स्थिति में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में बार-बार पैदा होने वाले खाद्य संकट के पीछे जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षरण, वनों की कटाई, गरीबी और कम कृषि उत्पादन जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।
वर्ष 2022 में युगांडा मानवाधिकार आयोग के आंकड़ों के अनुसार, करामोजा में भीषण भूख संकट के कारण 2,200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। सरकार का कहना है कि तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी काम किया जा रहा है। इसके तहत हाल ही में स्वीकृत करामोजा क्षेत्रीय विकास योजना के माध्यम से स्थानीय समुदायों को सूखे जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाया जाएगा।
करामोजा मामलों के मंत्री जॉन बैपटिस्ट लोकी ने कहा कि अगली बुवाई से पहले किसानों को सूखा सहने वाली, रोग प्रतिरोधी और जल्दी तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, युगांडा के फूड राइट्स अलायंस की कार्यकारी निदेशक एग्नेस किराबो ने कहा कि मानवीय सहायता में लगातार कमी के बीच सरकार का राहत अभियान बेहद आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से यूएसएआईडी जैसी संस्थाओं से मिलने वाली सहायता में भारी कटौती के बाद विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) को भी अपने राहत कार्य सीमित करने पड़े हैं। युगांडा में डब्ल्यूएफपी ने शरणार्थी आबादी के 63 प्रतिशत लोगों के लिए खाद्य सहायता बंद कर दी है, जिससे 10 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं सहायता प्राप्त करने वालों की संख्या घटाकर 6.63 लाख कर दी गई है।

















