उज्जैन, 28 जुलाई।
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने "एक भारत, अनेक परंपराएँ" की भावना को आगे बढ़ाते हुए "रस संगमम्" नाम से नई पहल शुरू की है। इस योजना के तहत मंदिर के निःशुल्क अन्नक्षेत्र में अब प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार श्रद्धालुओं को दक्षिण भारतीय पारंपरिक प्रसादम् परोसा जाएगा।
मंदिर प्रबंध समिति का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य देश की अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं को महाकाल की नगरी में एक सूत्र में जोड़ना है। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध भोजन परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास भी किया जाएगा। समिति के अनुसार, भारत की पहचान उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों से भी जुड़ी हुई है।
योजना के अनुसार प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालुओं को सांभर, इडली अथवा वड़ा, स्टीम चावल, मौसमी सब्जी और पोंगल प्रसाद के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं शुक्रवार को पुलिहोरा, पायसम, रसम, स्टीम चावल और मौसमी सब्जी का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि "रस संगमम् – एक भारत, अनेक परंपराएँ" केवल प्रसाद वितरण तक सीमित योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत की विविध पाक परंपराओं, संस्कृतियों और भावनात्मक जुड़ाव को एक मंच पर लाना है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति की विविधता का अनुभव कराने के साथ "विविधता में एकता" और "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। महाकाल की नगरी में देशभर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पहल सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्रीय एकात्मता का विशेष अनुभव लेकर आएगी।













