फिरोजाबाद, 30 जुलाई।
चूड़ियों के शहर के रूप में मशहूर फिरोजाबाद में एक ऐसा अनूठा शिव मंदिर मौजूद है जिसका इतिहास महाभारत काल से भी पुराना माना जाता है। इस ऐतिहासिक स्थल की बुनियाद हस्तिनापुर नरेश शांतनु द्वारा रखी गई थी। इस पावन धाम पर भक्तों ने अनेकों बार अलौकिक चमत्कार भी अनुभव किए हैं, जिसके चलते सावन के महीने में यहां दूर-दराज से कांवड़िए पहुंचते हैं और भारी तादाद में श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं।
जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर बसे सांती गांव में स्थित शांतेश्वर नाथ महादेव मंदिर अपनी पुरातात्विक महत्ता के लिए जाना जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश गोस्वामी के अनुसार बुजुर्गों से सुनने में आया है कि इस पावन स्थल का वजूद महाभारत युद्ध के पूर्व का है। राजा शांतनु भगवान आशुतोष के अनन्य उपासक थे, और उनके शासनकाल में एक नाग हर रोज आकर एक निश्चित जगह पर बैठ जाता था। जब उस भूमि की खोदाई की गई तो वहां से एक प्राचीन शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई। इस पिंडी की गहराई नापने के वास्ते कई बार प्रयास किए जा चुके हैं, मगर आज तक यह रहस्य बना हुआ है कि यह जमीन में कितनी गहराई तक फैली है। उन्होंने बताया कि महाभारत काल में भीष्म पितामह का जुड़ाव भी इसी क्षेत्र से रहा है। युद्ध समाप्त होने के पश्चात यहां आवागमन कम हो गया, लेकिन आज भी लोग इस जगह को भीष्म पितामह से जोड़कर देखते हैं। इस मंदिर के पास ही एक प्राचीन किला मौजूद है जो अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है।
पुजारी ने आगे बताया कि इस पवित्र परिसर में कई हैरान करने वाली घटनाएं सामने आती रही हैं। एक गाय अक्सर यहां आकर खड़ी हो जाती थी और उसका दूध स्वतः ही झरने लगता था। इसके अलावा एक सर्प भी मंदिर के आसपास ही डेरा डाले रहता है, जिसे कई बार भोलेनाथ की पिंडी से लिपटा हुआ देखा जा चुका है। यहां आने वाले हर अकीदतमंद की मनोकामना पूरी होती है। महंत ने जानकारी दी कि सावन मास के दौरान यहां विशाल मेला सजता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं।

















