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संपादकीय
30 Jul, 2026

फायर सेफ्टी अब 112 की तर्ज पर बनेगी प्रदेशव्यापी व्यवस्थाशहर से गांव तक एक जैसी सुरक्षा का दावा

मध्यप्रदेश में आग और आपात स्थितियों से निपटने के लिए शहरों से गांवों तक एक समान फायर सेफ्टी व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है।

भोपाल, 30 जुलाई।

मध्यप्रदेश में अब फायर सेफ्टी को लेकर व्यवस्था पूरी तरह बदली जा रही है। सरकार ने तय किया है कि जिस तरह 112 इमरजेंसी सेवा पूरे प्रदेश में एक समान काम करती है, उसी तर्ज पर फायर सेफ्टी और आपातकालीन सेवाओं का नेटवर्क भी बनाया जाएगा। अब तक यह सुविधा केवल नगर निगम क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन अब इसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों तक भी पहुंचाया जाएगा। इस कदम से यह उम्मीद की जा रही है कि आगजनी और अन्य आपात स्थितियों में समय पर मदद मिल सकेगी और जान-माल का नुकसान कम होगा।

प्रदेश में फायर सेफ्टी को लेकर लंबे समय से शिकायतें आ रही थीं। शहरों में तो कुछ हद तक इंतजाम थे, लेकिन गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड की सुविधा लगभग न के बराबर थी। नतीजा यह था कि छोटी-सी आग भी विकराल रूप ले लेती थी और तब तक कोई मदद नहीं पहुंच पाती थी, जब तक सब कुछ जलकर राख न हो जाए। इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार ने नया एक्ट लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस एक्ट के तहत पूरे प्रदेश में एक जैसी फायर सेवा होगी और 112 की तर्ज पर इसका संचालन किया जाएगा।

नए सिस्टम के तहत फायर स्टेशन और आपातकालीन सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। अब नगर निगम ही नहीं, बल्कि पंचायत और औद्योगिक क्षेत्रों में भी फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 22 एडवांस्ड मल्टीपरपज फायर व्हीकल खरीदे जा रहे हैं। साथ ही आधुनिक उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं, ताकि आग बुझाने के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन भी तेजी से किया जा सके। पानी की उपलब्धता के लिए 21 वाटर बाउजर के अलावा आधुनिक तकनीक वाले उपकरण भी शामिल किए जाएंगे। इन सबकी निगरानी के लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जहां से पूरे प्रदेश की फायर सेवाओं पर नजर रखी जा सकेगी।

अब तक फायर सेवाएं केवल शहरों तक सीमित थीं और ग्रामीण क्षेत्रों में आग लगने पर लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार तो मदद पहुंचने से पहले ही सब कुछ नष्ट हो जाता था। नए एक्ट के लागू होने के बाद ग्रामीण अंचल तक भी फायर सेवा पहुंचेगी और वहां भी 112 की तरह तुरंत रिस्पांस मिलेगा। इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों और छोटे व्यापारियों को भी फायदा होगा, क्योंकि फसल और गोदामों में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित होगी। प्रदेश में कई बड़े औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां रसायन और ज्वलनशील पदार्थों का काम होता है। वहां आग लगने पर बड़ा हादसा हो सकता है। अब तक वहां फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी कंपनियों पर थी, लेकिन कई बार संसाधनों की कमी के कारण समय पर आग पर काबू नहीं पाया जा सका। अब सरकार सीधे वहां फायर स्टेशन और प्रशिक्षित स्टाफ तैनात करेगी, जिससे औद्योगिक हादसों में कमी आने की संभावना है।

इस योजना के तहत 1930 हेल्पलाइन की तरह फायर सेवा के लिए भी एक कॉमन नंबर और कॉल सेंटर बनाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी मदद मांग सकेगा। कॉल मिलते ही नजदीकी फायर स्टेशन को सूचना जाएगी और टीम तुरंत मौके पर पहुंचेगी। इसके अलावा सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे, जो 24 घंटे काम करेंगे, ताकि रात में भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

इस योजना पर लगभग 55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि से नए वाहन, उपकरण, प्रशिक्षण और स्टाफ की भर्ती की जाएगी। खास बात यह है कि फायर कर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे केवल आग बुझाने ही नहीं, बल्कि रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन में भी सक्षम हों। महिलाओं और युवाओं को भी इस सेवा में शामिल करने की योजना है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

यह फैसला प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है, क्योंकि अब तक फायर सेफ्टी को लेकर कोई ठोस नीति नहीं थी। हर जिले में अलग-अलग व्यवस्था थी, जिससे समन्वय की कमी रहती थी। अब एक समान नीति और एक जैसा सिस्टम लागू होने से न केवल जवाबदेही तय होगी, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। हालांकि चुनौती यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से दुरुस्त की जाएं, वरना फायर वाहन समय पर नहीं पहुंच पाएंगे।

आम जनता के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि अब उन्हें यह डर नहीं रहेगा कि आग लगने पर मदद नहीं आएगी। सरकार का दावा है कि अगले तीन से पांच वर्षों में यह पूरा सिस्टम प्रदेश भर में लागू हो जाएगा और तब मध्यप्रदेश फायर सेफ्टी के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।

112 की तर्ज पर फायर सेवा का यह विस्तार केवल एक योजना नहीं, बल्कि आम आदमी की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम है। यदि इसे ईमानदारी से लागू किया गया और संसाधनों की कमी दूर की गई, तो निश्चित रूप से यह व्यवस्था प्रदेश के हर कोने में जान-माल की रक्षा करने में कारगर साबित होगी और लोग भी राहत की सांस ले सकेंगे।

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