भोपाल, 30 जुलाई।
भोपाल अब अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक नक्शे पर एक बड़ी पहचान बनाने जा रहा है। भारत की राजधानी दिल्ली और आर्थिक केंद्र मुंबई के बाद अब मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को ब्रिक्स देशों के सांस्कृतिक सम्मेलन की मेजबानी का अवसर मिला है। यह सम्मेलन न केवल भोपाल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि इसके जरिए भारत अपनी हजारों साल पुरानी संस्कृति, परंपरा, कला और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। ब्रिक्स देशों में शामिल ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में भाग लेंगे और पांचों देशों की सांस्कृतिक विविधता एक मंच पर देखने को मिलेगी।
ब्रिक्स समूह दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अब यह समूह केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा है। अब संस्कृति, शिक्षा और जनसंपर्क को भी इस समूह की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। इसी सोच के तहत भोपाल में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और आपसी समझ को मजबूत करना है। भोपाल को इस आयोजन के लिए चुना जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश अब सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां की विरासत, यहां के किले, यहां की आदिवासी कला और लोक संगीत दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।
सम्मेलन के दौरान पांचों देशों के संस्कृति मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भोपाल पहुंचेंगे। इनके साथ कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। चार दिवसीय इस सम्मेलन में विभिन्न सेमिनार, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भोपाल के प्रमुख स्थलों पर इन कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिससे विदेशी मेहमान न केवल सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे, बल्कि भोपाल की खूबसूरती और मध्यप्रदेश की संस्कृति को भी करीब से देख सकेंगे। त्रिपुरा के प्रसिद्ध लोकनृत्य से लेकर ब्राजील के सांबा तक, रूस के बैले से लेकर दक्षिण अफ्रीका के आदिवासी संगीत तक और भारत के शास्त्रीय नृत्य तथा लोककलाओं तक, सभी का संगम इस सम्मेलन में देखने को मिलेगा।
मध्यप्रदेश सरकार ने इस सम्मेलन की तैयारियां पहले से शुरू कर दी हैं। संस्कृति विभाग के अधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं, ताकि मेहमानों के स्वागत और आयोजन की हर व्यवस्था विश्वस्तरीय हो सके। भोपाल के टैगोर भवन और भारत भवन जैसे प्रतिष्ठित स्थानों को इस आयोजन के मुख्य केंद्र के रूप में चुना गया है। इसके अलावा हबीबगंज और पुराने भोपाल के बाजारों को भी सजाया जाएगा, ताकि विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की पारंपरिक जीवनशैली का अनुभव हो सके। सरकार का मानना है कि इस सम्मेलन से भोपाल को पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़ा लाभ मिलेगा और दुनिया भर में उसकी एक नई पहचान बनेगी।
इस सम्मेलन का महत्व केवल सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी बहुत अधिक है। ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में इनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सांस्कृतिक सहयोग के जरिए इन देशों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। भारत ने हमेशा 'वसुधैव कुटुंबकम' की सोच को अपनाया है और यह सम्मेलन उसी सोच का विस्तार है। जब अलग-अलग देशों के कलाकार एक मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि विविधता के बावजूद हम सब एक हैं।
भोपाल के लिए यह अवसर इसलिए भी खास है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में शहर ने सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत भवन यहां का अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कला केंद्र है, जहां हर साल देश-विदेश के कलाकार आते हैं। आदिवासी संग्रहालय और जनजातीय संग्रहालय दुनिया भर में अपनी तरह के अनोखे संग्रहालय हैं। यहां की शिल्पकला, चित्रकला और लोक संगीत को देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। अब ब्रिक्स सम्मेलन के बाद भोपाल को एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक शहर के रूप में और मजबूती मिलेगी तथा यहां सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्थानीय कलाकारों और छात्रों के लिए भी यह सम्मेलन एक बड़ा अवसर है। उन्हें विदेशी कलाकारों के साथ काम करने, सीखने और अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी को ब्रिक्स देशों की संस्कृति के बारे में जानकारी मिल सके और वे वैश्विक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित हों। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि सम्मेलन के दौरान एक सांस्कृतिक पुस्तक और स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा, जिसमें पांचों देशों की कला और परंपराओं का संकलन होगा।
हालांकि इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए कई चुनौतियां भी हैं। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात और आवास की व्यवस्था को पुख्ता करना होगा, ताकि विदेशी मेहमानों को किसी तरह की परेशानी न हो। भाषा की भाषा को दूर करने के लिए अनुवादकों की टीम भी तैयार की जा रही है। इसके अलावा मौसम और अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर वैकल्पिक योजना भी बनाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तैयारियां समय पर पूरी कर ली जाएंगी और यह सम्मेलन मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा।
यह सम्मेलन भारत की सॉफ्ट पावर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। आज दुनिया में भारत को केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में भी देखा जा रहा है। योग, आयुर्वेद, भारतीय संगीत और नृत्य आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय हैं। ब्रिक्स सम्मेलन के माध्यम से भारत अपनी इस सांस्कृतिक धरोहर को और आगे ले जा सकता है तथा अन्य देशों के साथ मिलकर सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
भोपाल में होने वाला ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति को विश्व मंच पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश को लाभ होगा। लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ेगी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से नए विचार तथा नई संभावनाएं जन्म लेंगी। भोपालवासी भी इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर उत्साहित हैं और अपने शहर को सबसे सुंदर तथा स्वागतयोग्य बनाने के लिए तैयार हैं। निश्चित रूप से यह सम्मेलन भोपाल को एक नई पहचान देगा और भारत की सांस्कृतिक विरासत को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

















