नई दिल्ली, 31 जुलाई।
संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा ने सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने से जुड़े सख्त संशोधन विधेयक को बुधवार को लोकसभा से हरी झंडी मिलने के बाद आखिरकार गुरुवार को अपनी स्वीकृति दे दी है। सदन में इस अहम मुद्दे पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस कानून के तहत दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस नए कानून के दायरे में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं, जिसके तहत अब दोषियों को अधिकतम दस साल की कैद, दस करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना और उनकी संपत्ति को जब्त करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामलों के जल्द निपटारे के लिए प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया जाएगा, ताकि इनकी सुनवाई रोजाना के आधार पर तेजी से पूरी की जा सके।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुलिस थाने में मामला दर्ज होने के महज दो महीनों के भीतर जांच का काम पूरा करना अनिवार्य होगा और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीनों के अंदर ही अदालत को अपनी सुनवाई पूरी करनी होगी। मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति देश के छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हुई है, जिससे बच्चों को अपनी पसंद के विषय चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिली है।
चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली जहां विपक्ष ने सरकार के इन संशोधनों को नाकाफी बताया और इसे केवल एक दिखावा करार दिया, वहीं कई दलों ने नीट परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त करने की जोरदार मांग भी उठाई। विपक्षी दलों के विरोध और हंगामे के बीच ही सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया ताकि अगले दिन फिर से कामकाज शुरू किया जा सके।

















