जयपुर, 01 अगस्त।
सरकारी भर्ती परीक्षाओं में डमी अभ्यर्थी बैठाकर लाखों रुपये की अवैध वसूली करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राजस्थान एसओजी ने लंबे समय से फरार चल रहे 10 हजार रुपये के इनामी दिलखुश मीणा को गिरफ्तार किया है। आरोपित पर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह डमी उम्मीदवार बैठाने के लिए बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि पुलिस थाना एसओजी में दर्ज मामले के तहत राजगढ़, अलवर निवासी दिलखुश मीणा को गिरफ्तार किया गया। वह काफी समय से फरार था और उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
जांच में सामने आया कि कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 15 जुलाई 2018 को आयोजित एसएससी-सीएचएसएल परीक्षा 2017 के द्वितीय चरण में संगठित गिरोह ने वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों पर बैठाकर प्रश्नपत्र हल कराए। इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई।
जांच के अनुसार दिलखुश मीणा गिरोह में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। उसने आरोपित चेतराम मीणा को सुशील कुमार मीणा के लिए डमी अभ्यर्थी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशाल चौधरी से संपर्क कराया था। इसके अलावा वह वास्तविक अभ्यर्थियों और गिरोह के सदस्यों के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ अवैध धनराशि के लेन-देन में भी अहम भूमिका निभा रहा था।
इस मामले में एसओजी पहले ही प्रमोद कुमार यादव, अवनीश कुमार उर्फ मोनू, चेतराम मीणा, विनय कुमार सिंह और सुनील कुमार मीणा सहित कुल 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। दिलखुश मीणा की गिरफ्तारी को इस संगठित परीक्षा चीटिंग गिरोह के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
फिलहाल गिरफ्तार आरोपित से एसओजी की टीम पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क की भूमिका की भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।






















