नई दिल्ली, 03 अगस्त।
देश में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है। वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि देश के 99.92 प्रतिशत आबाद गांवों में अब पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध है। जन धन दर्शक (JDD) ऐप के अनुसार, 6,01,328 आबाद गांवों में से 6,00,868 गांव बैंक शाखा, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) या इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) केंद्र से जुड़े हैं।
17 जुलाई 2026 तक देश में 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं, 17.36 लाख बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स और 1.65 लाख आईपीपीबी केंद्र बैंकिंग सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक आबाद गांव के पांच किलोमीटर के दायरे में कम से कम एक बैंकिंग केंद्र उपलब्ध कराना है।
आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पूर्व अनुमति के बिना शाखाएं खोलने की सुविधा दी है। शर्त यह है कि नई शाखाओं में कम से कम 25 प्रतिशत शाखाएं बैंकिंग सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जाएं।
सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत 17 जुलाई 2026 तक 58.77 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में 3.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है, जो वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाती है।
कृषि ऋण वितरण को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए सरकार ने जन समर्थ पोर्टल, नाबार्ड ई-केवाईसी एप्लिकेशन, कृषिका प्लेटफॉर्म और किसान ऋण पोर्टल (KRP) जैसी डिजिटल व्यवस्थाएं लागू की हैं। इनसे लाभार्थियों की पहचान, डिजिटल सत्यापन, ऋण आवेदन और ब्याज सब्सिडी दावों के निपटारे की प्रक्रिया सरल हुई है।
डिजिटल भुगतान की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक लगातार कदम उठा रहे हैं। इस दिशा में इंडिया डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (IDPIC) की स्थापना की गई है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से धोखाधड़ी से जुड़े अलर्ट बैंकों के साथ वास्तविक समय में साझा करेगा।
आरबीआई ने डिजिटल भुगतान के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानक लागू किए हैं और संदिग्ध बैंक खातों की पहचान के लिए एआई आधारित 'म्यूलहंटर' टूल विकसित किया है। वहीं गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सरकार और बैंक साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एसएमएस, रेडियो, डिजिटल अभियानों और ई-बीएएटी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी संचालन कर रहे हैं।

















