भोपाल, 03 अगस्त।
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद और नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में नर्मदा नदी के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर जिला स्तरीय कार्यशालाओं की तैयारियां शुरू हो गई हैं। परिषद के राज्य कार्यालय में आयोजित बैठक में आगामी 9, 16 और 23 अगस्त 2026 को नर्मदा तटीय 16 जिलों में आयोजित होने वाली ‘नर्मदा संवाद वक्ता उन्मुखीकरण कार्यशालाओं’ की रूपरेखा पर मंथन किया गया।
जनसंपर्क अधिकारी के.के. जोशी ने बताया कि परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने कहा कि नर्मदा नदी सदियों से जीवन और संस्कृति का आधार रही है। उन्होंने कहा कि नर्मदा के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज में संस्कार और जनजागरण की आवश्यकता है। आधुनिक विकास के प्रभाव से पारंपरिक मूल्यों में आई कमी को दूर करने के लिए सामाजिक सहभागिता बढ़ानी होगी।
वरिष्ठ समाजसेवी बृजकिशोर भार्गव ने कहा कि नर्मदा का आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जनमानस के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी आवश्यक है। उन्होंने आमजन से नर्मदा संरक्षण अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ ने बताया कि मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद वर्ष 2009 से नदियों के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आगामी कार्यशालाओं में ऐसे समाजसेवियों की पहचान की जाएगी, जो नर्मदा संरक्षण के लिए जनभागीदारी को मजबूत कर सकें।
नर्मदा समग्र के कार्यपालक निदेशक कार्तिक सप्रे ने कार्यशालाओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इनमें नर्मदा एवं उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि, घाट संस्कृति, घाट संरक्षण, नर्मदा पथ और नर्मदा परिक्रमा जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।
बैठक में परिषद के सलाहकार करन कौशिक ने भी मार्गदर्शन दिया। इस अवसर पर नर्मदा तटीय जिलों के संभाग एवं जिला समन्वयक सहित राज्य कार्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे।

















