हरिद्वार, 03 अगस्त।
पवित्र सावन मास के प्रथम सोमवार के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार पूरी तरह से भगवान शिव की भक्ति में सराबोर नजर आई। ब्रह्ममुहूर्त के आगमन के साथ ही शहर के तमाम प्रतिष्ठित शिवालयों में शिवभक्तों और कांवड़ियों का तांता लग गया। चहुंओर गूंजते 'हर-हर महादेव' तथा 'बम-बम भोले' के जयघोष से संपूर्ण वातावरण अत्यंत ऊर्जावान और भक्तिमय बन गया।
कनखल क्षेत्र स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर, तिलभाण्डेश्वर महादेव, नीलेश्वर महादेव, बिल्वकेश्वर महादेव तथा दुःखभंजन महादेव समेत अन्य सभी मंदिरों को मनमोहक पुष्पों और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया था। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ देवाधिदेव महादेव का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक कर अपने परिवार की खुशहाली व संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की।
ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के केंद्र दक्षेश्वर महादेव मंदिर में प्रबंध समिति द्वारा आगंतुकों की सुविधा के वास्ते विशेष प्रबंध किए गए थे। दर्शनार्थियों के सुगम आवागमन के लिए पृथक कतारों की व्यवस्था के साथ-साथ पेयजल, सुरक्षा और प्राथमिक चिकित्सा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दूर-दराज से गंगाजल लेकर पहुंचे कांवड़ियों ने भी पूरी निष्ठा के साथ देवाधिदेव का अभिषेक किया।
पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दक्ष द्वारा अपने प्रायश्चित स्वरूप भगवान शिव से अपनी ससुराल में विराजने का आग्रह किया गया था, जिसके वचनों के तहत आज भी सावन मास में विशेष परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। प्रथम सोमवार के इस विशेष पर्व पर संपूर्ण शहर में भगवा वस्त्रधारी शिवभक्तों का रेला उमड़ पड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा मार्ग में भंडारे और विश्राम स्थलों की सुंदर व्यवस्थाएं की गईं।
प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध देखने को मिले। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित स्वयं कनखल मंदिर पहुंचे और उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने साफ-सफाई, यातायात नियंत्रण तथा सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
















