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राजनीति
06 Aug, 2026

राज्यसभा में पोस्टपार्टम डिप्रेशन और कामकाजी महिलाओं के मुद्दे गूंजे

राज्यसभा में सांसदों ने पोस्टपार्टम डिप्रेशन और मॉल में कार्यरत महिलाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

नई दिल्ली, 6 अगस्त।

राज्यसभा में गुरुवार को विशेष उल्लेख के दौरान पोस्टपार्टम डिप्रेशन और मॉल में कार्यरत महिलाओं की कार्य परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सदस्यों ने इन विषयों को गंभीर बताते हुए सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी पहल करने की आवश्यकता जताई।

सांसद राजथी सलमा ने कहा कि प्रसव के बाद कई महिलाओं को लगातार उदासी, भूख में कमी और नवजात से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है। उनके अनुसार, देश में इससे जुड़े मामलों का कोई राष्ट्रीय स्तर का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो जाता है।

उन्होंने कहा कि समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में इसका प्रभाव मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इससे नवजात को पर्याप्त पोषण और स्तनपान मिलने में बाधा आ सकती है तथा उसके मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है।

राजथी सलमा ने सरकार से राष्ट्रीय मातृ मानसिक स्वास्थ्य रणनीति लागू करने की मांग करते हुए कहा कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समय रहते पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके।

विशेष उल्लेख के दौरान सांसद सुलता देव ने मॉल और बड़े वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत महिला कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को प्रतिदिन आठ से दस घंटे तक लगातार खड़े रहकर काम करना पड़ता है। अधिकांश स्थानों पर बैठने या विश्राम की समुचित व्यवस्था नहीं होने से कम उम्र में ही कमर दर्द, पैरों में सूजन, अत्यधिक थकान और सर्वाइकल जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि कई कार्यस्थलों पर स्वच्छ रेस्ट रूम, सुरक्षित विश्राम स्थल और नियमित अंतराल पर विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। उनके अनुसार, यह स्थिति महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल के अधिकार के अनुरूप नहीं है।

सुलता देव ने सरकार से मॉल और रिटेल क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए बैठने की अनिवार्य व्यवस्था, स्वच्छ रेस्ट रूम, सुरक्षित विश्राम स्थल, नियमित ब्रेक और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने इन व्यवस्थाओं के प्रभावी पालन के लिए सख्त निगरानी तंत्र लागू करने का भी आग्रह किया।

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