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सरकार व नीतियाँ
06 Aug, 2026

आयुर्वेद को डिजिटल बढ़त, सीसीआरएएस की कई नई पहल शुरू

नई दिल्ली में आयोजित सीसीआरएएस की शासी निकाय बैठक में आयुर्वेद अनुसंधान, डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई परियोजनाओं और पहलों का शुभारंभ किया गया।

नई दिल्ली, 06 अगस्त।

देश में आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक नई पहल करते हुए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) की शासी निकाय की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद, अनुसंधान, नवाचार, आधुनिक तकनीक और संस्थागत क्षमता के विस्तार को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर परिषद की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और अनुसंधान अवसंरचना से जुड़ी पहलों का शुभारंभ भी किया गया।

बैठक के दौरान जाधव ने वर्चुअल माध्यम से सीसीआरएएस के क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) पुणे में एनिमल हाउस तथा आरएआरआई रानीखेत में स्टाफ क्वार्टर्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। साथ ही आरएआरआई नागपुर में प्रस्तावित 50 बिस्तरों वाले नए आयुर्वेद अस्पताल का भूमि पूजन भी किया।

इस अवसर पर सीसीआरएएस-परम्परा पहल का भी शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य भारत की स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं, एथनोमेडिकल पद्धतियों और पारंपरिक पशु चिकित्सा संबंधी ज्ञान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, मूल्यांकन और वैज्ञानिक सत्यापन करना है।

जाधव ने सीसीआरएएस नेशनल रिसर्च रिकग्निशंस पोर्टल भी लॉन्च किया। इस डिजिटल मंच में सीसीआरएएस प्रकाश, सीसीआरएएस नवोन्मेष और सीसीआरएएस प्रबोध जैसी पहलें शामिल की गई हैं। यह मंच स्नातकोत्तर आयुर्वेद अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक संचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को पहचान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

बैठक में आयुर-डिक्ट एंड्रॉयड एप्लिकेशन भी प्रस्तुत किया गया। सीसीआरएएस के इस पहले एंड्रॉयड एप में कई आयुर्वेद शब्दकोशों को एक ही मंच पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए आयुर्वेद संबंधी जानकारी तक पहुंच अधिक आसान होगी।

शासी निकाय को संबोधित करते हुए जाधव ने कहा कि आयुर्वेद एक परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां वैज्ञानिक सत्यापन, नवाचार और वैश्विक पहुंच को भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीसीआरएएस ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब आयुर्वेद को अधिक वैज्ञानिक, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य तथा सुलभ बनाने के प्रयासों को गति देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के अगले विकास चरण में प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और बाजार से जुड़ाव को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘Heal by Ayurveda, Heal in India and Make in India’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने वैज्ञानिक उत्कृष्टता, मानकीकरण और नवाचार के माध्यम से आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य समाधान के रूप में विकसित करने की बात कही।

जाधव ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने, ट्रांसलेशनल रिसर्च को प्रोत्साहित करने तथा नैदानिक अनुसंधान, डेटा प्रबंधन और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान की प्रामाणिकता और मूल सिद्धांतों के संरक्षण को भी आवश्यक बताया।

उन्होंने कहा कि युवा शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों और उद्योग की सक्रिय भागीदारी से आयुर्वेद को प्रयोगशालाओं से बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए अनुसंधान अनुदान, इनक्यूबेशन सहायता, मार्गदर्शन और उद्योग साझेदारी के माध्यम से मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की जरूरत है।

जाधव ने युवा अनुसंधान कोष, आयुर्वेद स्टार्टअप एक्सेलेरेटर और ग्लोबल आयुर्वेद चैलेंज जैसी पहलों पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया। उन्होंने शासी निकाय से आधुनिक, साक्ष्य-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी आयुर्वेदिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय अनुसंधान-प्रेरित ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना, डिजिटल नवाचार और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के माध्यम से साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि नई पहलें अनुसंधान क्षमता, शैक्षणिक उत्कृष्टता और ज्ञान की सुलभता को और मजबूत करेंगी।

सीसीआरएएस के महानिदेशक एवं शासी निकाय के सदस्य सचिव प्रो. (वैद्य) रबिनारायण आचार्य ने परिषद की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्था शास्त्रीय आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, डिजिटल नवाचार और गुणवत्तापूर्ण साक्ष्यों के माध्यम से और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि नई पहलें अनुसंधान अवसंरचना का विस्तार करेंगी, युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करेंगी और भारत की पारंपरिक ज्ञान विरासत के संरक्षण में सहयोग देंगी। साथ ही आयुर्वेद को शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए अधिक सुलभ बनाने में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

बैठक में सीसीआरएएस के शासी निकाय के सदस्य, आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, परिषद के वैज्ञानिक और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। शासी निकाय ने परिषद की उपलब्धियों की सराहना करते हुए अनुसंधान, नवाचार, संस्थागत क्षमता और आयुर्वेद की वैश्विक पहुंच को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

बैठक में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, नवाचार और संस्थागत उत्कृष्टता के माध्यम से साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही यह विश्वास व्यक्त किया गया कि इन निर्णयों से आयुर्वेद अनुसंधान में सीसीआरएएस की भूमिका और मजबूत होगी तथा वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में उसके योगदान का दायरा भी विस्तृत होगा।

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