भोपाल, 6 अगस्त।
मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित तुलसी शोध संस्थान ने वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय को ‘पद्मभूषण युगतुलसी पं. रामकिंकर उपाध्याय राष्ट्रीय पुरस्कार’ से अलंकृत किया। यह सम्मान गुरुवार को तुलसी मानस प्रतिष्ठान में आयोजित तुलसी जयंती के अवसर पर हुए भक्ति संगीत एवं अलंकरण समारोह-2026 में पत्रकारिता, राष्ट्रचिंतन, संस्कृति और समसामयिक विषयों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। वर्तमान में वे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के अध्यक्ष भी हैं।
सम्मान ग्रहण करने के बाद रामबहादुर राय ने कहा कि पद्मभूषण पं. रामकिंकर उपाध्याय ने श्रीरामचरितमानस की सरल और प्रभावी व्याख्या के माध्यम से उसे जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। उन्होंने बताया कि पं. रामकिंकर उपाध्याय ने लगभग 80 से 85 ग्रंथों की रचना की, जिनका व्यवस्थित संकलन भी उपलब्ध है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मात्र 19 वर्ष की आयु में लिखी गई ‘प्रेममूर्ति भरत’ में श्रीरामचरितमानस के पात्र भरत के प्रेम, त्याग और आदर्श व्यक्तित्व का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया है।
कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि पं. रामकिंकर उपाध्याय ने श्रीरामचरितमानस की व्याख्या के जरिए भारतीय सनातन संस्कृति के मूल्यों को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारतीय ज्ञान, साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तित्वों के अभिनंदन का माध्यम है। उनके अनुसार रामबहादुर राय का योगदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी रहेगा।
समारोह में संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव ने प्रशस्ति वाचन किया। इस दौरान दीदी मंदाकिनी श्रीरामकिंकर ने भी अपने विचार रखे। स्वागत उद्बोधन में अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि यह सम्मान भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रचेतना के शाश्वत मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामबहादुर राय ने पत्रकारिता को राष्ट्रनिर्माण का सशक्त माध्यम बनाते हुए सत्य, वैचारिक प्रतिबद्धता और भारतीय दृष्टि को प्रभावी अभिव्यक्ति दी है।
समारोह में शर्मा बंधु एवं साथियों ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में दीदी मंदाकिनी, अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा, संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
















