जम्मू, 6 अगस्त।
सुरक्षा कारणों से एक दिन के लिए स्थगित की गई अमरनाथ यात्रा गुरुवार को फिर से शुरू हो गई। अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने की सातवीं बरसी के मद्देनजर बुधवार को यात्रा रोकी गई थी। अब यात्रा दोबारा शुरू होने के साथ श्रद्धालुओं का 28वां जत्था जम्मू से रवाना किया गया।
संयुक्त पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार, भगवती नगर यात्री निवास से तड़के 2:45 बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 1,801 श्रद्धालुओं का जत्था बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को भी पहलगाम मार्ग के लिए किसी जत्थे को रवाना नहीं किया गया। बालटाल जाने वाले श्रद्धालुओं में 1,347 पुरुष, 351 महिलाएं, 89 साधु और 14 साध्वियां शामिल हैं। इन्हें कुल 74 वाहनों के माध्यम से भेजा गया।
यात्रा के लिए लगाए गए वाहनों में 40 बसें, 12 मीडियम मोटर वाहन, 19 हल्के मोटर वाहन और तीन दोपहिया वाहन शामिल हैं। पूरे जत्थे के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान सुरक्षा में तैनात रहे।
यह यात्रा हिंदू धर्म की प्रमुख और पवित्र तीर्थ यात्राओं में गिनी जाती है। श्रद्धालु हर वर्ष जम्मू-कश्मीर की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं, जहां प्राकृतिक रूप से हिमलिंग का निर्माण होता है। अमरनाथ गुफा अनंतनाग जिले में समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
इस वर्ष यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से हुई थी और इसका समापन 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन होगा। अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए बालटाल और पहलगाम दो प्रमुख मार्ग हैं। बालटाल मार्ग सोनमर्ग के निकट से शुरू होता है और लगभग 14 से 16 किलोमीटर लंबा तथा अधिक खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता है।
पहलगाम मार्ग को पारंपरिक और अपेक्षाकृत अधिक सुविधाजनक माना जाता है। यह चंदनवाड़ी से शुरू होकर शीशनाग और पंचतरणी जैसे प्रमुख पड़ावों से गुजरता है। इस मार्ग से यात्रा पूरी करने में श्रद्धालुओं को तीन से पांच दिन का समय लगता है।















