नई दिल्ली, 6 अगस्त।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार सुबह सामाजिक मंच एक्स पर साझा किए गए अपने सुभाषितम् के माध्यम से धरती माता के गुणों का स्मरण किया और उनकी सेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी की गोद में सभी प्रकार की वनस्पतियां और औषधियां विकसित होती हैं।
प्रधानमंत्री ने अथर्ववेद के भूमि सूक्त का एक मंत्र साझा किया, जिसमें धरती माता के प्रति सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और समस्त विश्व के कल्याण की भावना व्यक्त की गई है। यह मंत्र अथर्ववेद के काण्ड 12, सूक्त 1, मंत्र 17 से लिया गया है।
पोस्ट में साझा किए गए अर्थ के अनुसार, पृथ्वी माता को ऐसी स्थिर और विशाल शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है, जिसमें श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां उत्पन्न होती हैं तथा जो समस्त जीवों का पालन-पोषण करती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे सद्गुणों से समृद्ध, कल्याणकारी और सुख-साधनों का आधार बनने वाली धरती माता की सेवा के लिए सभी को सदैव समर्पित रहना चाहिए।















