नई दिल्ली, 15 सितंबर।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान पर बैंक किसी तरह का शुल्क नहीं लगा सकेंगे। यह नियम रुपे आधारित डेबिट कार्ड से किए जाने वाले 2,000 रुपये तक के भुगतान पर भी लागू होगा।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि इन माध्यमों से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर बैंक या सिस्टम प्रदाता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकेंगे।
वित्त मंत्रालय ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के तहत नियमों में बदलाव की अधिसूचना जारी की है। इसमें 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन और रुपे आधारित डेबिट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
पिछले महीने सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि उपभोक्ताओं से यूपीआई के जरिए भुगतान करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होने की स्थिति में यह केवल तय सीमा से अधिक के चुनिंदा लेनदेन तक सीमित रहेगा।
सरकार के अनुसार सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेनदेन निशुल्क बने रहेंगे और व्यापारियों पर कोई व्यापक एमडीआर लागू नहीं होगा। ऐसे शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू एमडीआर की तुलना में काफी कम होंगे।
यह स्पष्टीकरण भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में हालिया संशोधन को लेकर उठी चिंताओं के बीच आया है। संशोधन के बाद यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर शुल्क लगाए जाने की आशंका को लेकर चर्चा शुरू हुई थी।
















