अयोध्या, 22 सितंबर।
अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़ी चोरी के 105 मामले सीसीटीवी कैमरों में दर्ज होने की जानकारी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई। विशेष जांच दल (एसआइटी) की स्थिति रिपोर्ट के आधार पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने जांच से जुड़ी जानकारी रखी।
अदालत को बताया गया कि एसआइटी की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर तक आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को आरोपपत्र पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चोरी के मामलों में हुई गिरफ्तारियों और जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों की जानकारी दी गई। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री के आधार पर आरोपितों की पहचान किए जाने की प्रक्रिया भी रिपोर्ट में बताई गई है।
एसआइटी की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर में दान के रूप में मिलने वाली मूल्यवान वस्तुओं की रसीदें साफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती हैं। इसके बाद इन वस्तुओं को भारतीय स्टेट बैंक के लाकर में रखा जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान दान चोरी की 105 घटनाओं की पहचान हुई। सुप्रीम कोर्ट ने जांच से संबंधित प्रस्तुत सभी जानकारियों को रिकार्ड पर ले लिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने एसआइटी की रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे देने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह मामले को सत्र न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाना चाहती। जरूरत महसूस होने पर आगे की जांच के संबंध में आदेश दिया जाएगा।
दान चोरी का मामला सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय और अनिल मिश्रा को उनके पदों से हटा दिया गया था। इसके बाद ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व वाली प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई। पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को सीईओ नियुक्त किया गया है।
जितेंद्र मिश्रा ने व्यवस्था में बदलाव किए जाने और आगे की कार्यप्रणाली में सुधार की बात कही है। राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय एसआइटी गठित की थी। इसका नेतृत्व लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं।
एसआइटी ने 23 जून को राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में कई कड़े सुझाव दिए गए थे। मामले में दर्ज एफआइआर में आठ लोगों के नाम शामिल हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं।
एफआइआर में कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। सभी नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
















