भोपाल, 15 सितंबर।
मध्य प्रदेश ने चेन्नई में आयोजित इंडिया टूरिज्म समिट 2026 में खुद को ‘द बीटिंग हार्ट ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रस्तुत किया। राज्य पर्यटन विभाग ने एडवेंचर, वन्यजीव, आध्यात्मिक, फिल्म और अनुभव आधारित पर्यटन के साथ निवेश की संभावनाओं को भी सामने रखा।
समिट के विशेष सत्र में पर्यटन विभाग के सचिव एवं एमपी टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने ‘द बीटिंग हार्ट ऑफ इंडिया–डिस्कवरिंग ए न्यू वर्ल्ड’ विषय पर प्रदेश के पर्यटन विकास और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ पर्यटन के नए क्षेत्रों को भी प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश पर्यटन की कॉर्पोरेट फिल्म दिखाई गई। गोल्ड पार्टनरशिप के तहत प्रतिभागियों के लिए प्रदेश के पारंपरिक और स्थानीय व्यंजनों की व्यवस्था की गई। इससे लोगों को मध्य प्रदेश की संस्कृति और स्थानीय स्वाद से परिचित होने का अवसर मिला।
डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्य प्रदेश अब पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर ऐसा व्यापक पर्यटन तंत्र तैयार कर रहा है, जिसमें विरासत के साथ आतिथ्य, प्रकृति के साथ रोमांच और आध्यात्मिकता के साथ संस्कृति को जोड़ा जा रहा है। वन्यजीव, ग्रामीण, विरासत, जनजातीय, स्वास्थ्य, रोमांच, चिकित्सा, गोल्फ और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं है। नए पर्यटन स्थलों का विकास, बेहतर अनुभव, स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर और टिकाऊ एवं समावेशी पर्यटन व्यवस्था तैयार करना भी प्राथमिकता है।
प्रदेश में पर्यटकों के लिए कई नए अनुभव विकसित किए जा रहे हैं। फॉर्सिथ ट्रेक, पेंच मोगली ट्रेक, तवा-मढ़ई साइकिलिंग, पचमढ़ी मानसून मैराथन, ओरछा में बेतवा नदी राफ्टिंग और पेंच मोनोलिथ्स ट्रेल इनमें शामिल हैं। उज्जैन को स्काईडाइविंग केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वर्ष 2022 से अब तक 1,200 से अधिक लोग 10,000 फीट की ऊंचाई से स्काईडाइविंग कर चुके हैं।
आध्यात्मिक पर्यटन में भी मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। उज्जैन के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर के दो ज्योतिर्लिंगों के साथ चित्रकूट, मैहर, दतिया और सलकनपुर जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। नर्मदा परिक्रमा भी प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अनुभव करने का अवसर देती है।
खजुराहो अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव, तानसेन समारोह, लोकरंग और भगोरिया जैसे आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को पर्यटन से जोड़ रहे हैं। वन्यजीव पर्यटन में कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना, सतपुड़ा और कूनो प्रमुख केंद्र हैं। प्रदेश में नौ टाइगर रिजर्व, 12 राष्ट्रीय उद्यान और 24 वन्यजीव अभयारण्य हैं।
फिल्म पर्यटन भी मध्य प्रदेश में तेजी से उभर रहा है। अब तक प्रदेश में 502 फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इससे करीब 1,200 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 1.5 लाख रोजगार अवसर जुड़े हैं। ‘पंचायत’, ‘स्त्री’ और ‘लापता लेडीज’ जैसी फिल्मों की शूटिंग ने प्रदेश के कई स्थानों को नई पहचान दिलाई है। फिल्म पर्यटन नीति के तहत ऑनलाइन अनुमति और व्यवस्थित प्रक्रियाओं से फिल्म निर्माण को आसान बनाया जा रहा है।
















