भोपाल, 18 सितंबर।
मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को प्राथमिक शिक्षा से लेकर विदेश में उच्च अध्ययन तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पिछले 15 वर्षों में छात्रवृत्ति, निशुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण सहित अलग-अलग योजनाओं के लिए 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन योजनाओं से पिछड़ा वर्ग के करीब 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।
प्री और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से शिक्षा को सहारा
प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य स्कूली बच्चों की पढ़ाई जारी रखना और बीच में पढ़ाई छोड़ने की स्थिति को कम करना है। वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक इस योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के 4 करोड़ 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 2,535 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। वहीं स्कूल शिक्षा में बेहतर अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए संचालित प्रावीण्य छात्रवृत्ति योजना में 2,185 विद्यार्थियों को 1 करोड़ 69 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है।
उच्च और व्यावसायिक शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से भी आर्थिक सहायता मिली है। वर्ष 2012-13 से 2026-27 के बीच पिछड़ा वर्ग के 84.22 लाख विद्यार्थियों को इस योजना के तहत 10,467 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क प्रशिक्षण
पिछड़ा वर्ग के युवाओं को प्रतियोगी और प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने के लिए विशेष प्रशिक्षण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2021-22 में शुरू हुई सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना के तहत 11,174 शिक्षित युवाओं को निशुल्क कोचिंग दी गई। इस पर 23 करोड़ 9 लाख रुपये खर्च किए गए।
संघ और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले पिछड़ा वर्ग के 3,354 अभ्यर्थियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत 7 करोड़ 64 लाख रुपये की राशि दी गई। इसके अलावा वर्ष 2026-27 से शुरू शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना के तहत 4 करोड़ 83 लाख रुपये खर्च कर 3,827 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
विदेश में पढ़ाई के लिए भी आर्थिक मदद
पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्ष 2008-09 से अब तक इस योजना के तहत पिछड़ा वर्ग के 341 विद्यार्थियों को 122 करोड़ 9 लाख रुपये का वित्तीय अनुदान दिया गया है।
















