भोपाल, 18 सितंबर।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ कथित फर्जी अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेकर उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्ति पाने के आरोप में जांच शुरू की है। यह कार्रवाई गुना जिले के राघोगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत के आधार पर की गई है।
मामले में आरोप है कि संबंधित अधिकारी ने खुद को ST वर्ग का अभ्यर्थी बताते हुए जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लिया और मध्य प्रदेश पुलिस में DSP के पद पर नियुक्ति हासिल की। इस संबंध में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है।
प्रकरण से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार, संबंधित अधिकारी के पक्ष में वर्ष 1984 में विदिशा जिले से ST जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था। प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर शिकायत मिलने के बाद मध्य प्रदेश शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने इसकी जांच की। समिति ने पाया कि संबंधित अधिकारी विदिशा जिले के मूल निवासी नहीं थे। इसके बाद प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित कर दिया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले संबंधित अधिकारी ने स्वयं को OBC अभ्यर्थी घोषित किया था। उन्होंने मध्य प्रदेश में शासकीय शिक्षक के रूप में भी कार्य किया था। बाद में पुलिसेवा में DSP पद पर नियुक्ति के बाद पदोन्नति के जरिए वेतन, भत्ते और अन्य सेवा लाभ प्राप्त किए।
छानबीन समिति ने जाति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की भी जांच की। इसमें तत्कालीन सक्षम शासकीय अधिकारी की भूमिका सामने आने के बाद प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सतर्कता शाखा अब दस्तावेजों और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगा रही है कि कथित अमान्य प्रमाणपत्र से भर्ती, नियुक्ति, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों में कितना लाभ मिला।
















