सिएटल, 18 सितंबर।
माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला ने सिएटल के तेजी से बढ़ते तकनीकी समुदाय और भारत के साथ उसके मजबूत होते संबंधों की सराहना की।
नडेला सिएटल स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन महावाणिज्यदूत प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में किया गया।
‘आइडियाज4इंडिया: इंडियन अमेरिकन टेक सीईओ फोरम | अनलॉकिंग द टेक डिविडेंड’ नाम से आयोजित यह कार्यक्रम गुरुवार को महावाणिज्य दूतावास परिसर में हुआ। यह फरवरी में नई दिल्ली में आयोजित भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन के बाद की कड़ी थी।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रेटर सिएटल क्षेत्र में सक्रिय भारतीय-अमेरिकी तकनीकी समुदाय की विशेषज्ञता और अनुभव से सीखना था।
नडेला ने कहा कि उन्होंने करीब 35 वर्षों में सिएटल के तकनीकी समुदाय को विकसित होते देखा है। उन्होंने भारत के साथ उसके संबंधों के बनने और मजबूत होने पर प्रसन्नता जताई।
नडेला ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को व्यापक उपयोग वाली तकनीक बताते हुए कहा कि इसके लाभ अलग-अलग देशों, समुदायों और क्षेत्रों में इसके व्यापक प्रसार पर निर्भर करेंगे।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने भारतीय मूल के तकनीकी प्रमुखों और मंच से जुड़े अन्य प्रतिभागियों की भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी को और गहरा करने की इच्छा का स्वागत किया।
क्वात्रा ने दोहराया कि भारत अपनी एआई पहल को समावेशिता, खुलेपन, संप्रभुता, लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षा और भरोसे के सिद्धांतों पर आधारित रखने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मंच पर भारतीय मूल के कई प्रमुख तकनीकी अधिकारी शामिल हुए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, अर्धचालक, क्लाउड ढांचा, एयरोस्पेस और उद्यम सॉफ्टवेयर जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक समय से काम कर रहे विशेषज्ञ भी शामिल थे।
कार्यक्रम में 40 से अधिक भारतीय मूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी शामिल हुए। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, बोइंग, ओपनएआई, एंथ्रोपिक, इंटेल, वीम सॉफ्टवेयर, हेलियन, रिदम्स एआई, जेनोटी, एनिका डेटा, सीकआउट और स्टेनली समेत प्रशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र की कई प्रमुख तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे।
यूएसबी-सी ड्राइव के आविष्कारक और इंटेल के पूर्व अधिकारी अजय भट्ट ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
सिएटल में आयोजित यह मंच भारतीय-अमेरिकी तकनीकी नेताओं का अपनी तरह का पहला सम्मेलन था। इसमें नवाचार, प्रतिभा और ऐसे अवसरों पर विचार साझा किए गए, जो भारत की एआई यात्रा में योगदान देने के साथ भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी को मजबूत कर सकते हैं।
भारतीय महावाणिज्य दूतावास के अनुसार, यह मंच आगे भी भारत-अमेरिका तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम कर सकता है। इसमें भारत-अमेरिका ट्रस्ट पहल भी शामिल है।
इस पहल के तहत दोनों देश अपने-अपने नवाचार तंत्र को जोड़ने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, अर्धचालक, अंतरिक्ष, दूरसंचार और जैव प्रौद्योगिकी में संयुक्त विकास और उत्पादन सहित सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
मंच के दौरान तकनीकी अधिकारियों ने भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने के लिए सुझाव दिए। चर्चा में एआई ढांचा, डेटा केंद्र, अर्धचालक डिजाइन और निर्माण, क्वांटम अनुसंधान, प्रतिभा और कौशल विकास, एयरोस्पेस तथा उन्नत विनिर्माण जैसे विषय शामिल रहे।
कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी के दोतरफा स्वरूप को भी रेखांकित किया गया। इसमें बताया गया कि मंच में शामिल कई कंपनियों के भारत में बड़े इंजीनियरिंग, अनुसंधान और व्यावसायिक संचालन हैं।
कई अमेरिकी तकनीकी कंपनियों ने भारतीय बाजार में अवसरों को लेकर रुचि जताई है और देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की घोषणा की है।
माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 से 2029 के बीच भारत में 17.5 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। चार वर्षों में किया जाने वाला यह उसका एशिया में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है, जिसका उद्देश्य क्लाउड और एआई ढांचे, कौशल विकास तथा संचालन को आगे बढ़ाना है।
अमेजन ने 2026 से 2030 के बीच कुल 48 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इसमें मुंबई और हैदराबाद में एडब्ल्यूएस डेटा केंद्रों की क्षमता बढ़ाना भी शामिल है। खुदरा कंपनी कॉस्टको भी हैदराबाद में अपना पहला वैश्विक क्षमता केंद्र स्थापित कर रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत सिएटल के भारतीय मूल के दो प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर हुई। हाल ही में निधन हुए इकरटिस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर बोडस तथा मैड्रोना वेंचर ग्रुप के प्रबंध निदेशक और माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व कॉरपोरेट उपाध्यक्ष एस. सोमसेगर को उनके योगदान के लिए याद किया गया।
दोनों ने सिएटल के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने और भारतीय मूल के नवोदित उद्यमों को सहयोग देने में योगदान दिया था।
















