उज्जैन, 19 सितंबर।
शनिवार तड़के भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस दौरान भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आरती के दर्शन किए।
सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। पंडे-पुजारियों ने भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत से अभिषेक किया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस का उपयोग किया गया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान और पूजन हुआ। इसके बाद बाबा को भोग लगाया गया और कपूर आरती की गई।
भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। मस्तक पर भांग और चंदन से सजावट कर त्रिपुंड लगाया गया तथा त्रिशूल धारण कराया गया। भगवान को रजत ‘ॐ’, बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और विभिन्न रुद्राक्ष मालाएं भी अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों से बाबा का अलंकरण किया गया।
मुख्य भस्म आरती के लिए ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढका गया। इसके बाद महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए इस आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहीं। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा वातावरण शिवभक्ति में सराबोर नजर आया।
















