उज्जैन, 24 सितंबर।
धर्म नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार के पावन अवसर पर तड़के होने वाली भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का अलौकिक और राजा स्वरूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया। रजत मुकुट, त्रिपुंड, दिव्य आभूषणों और सुगंधित फूलों की मालाओं से सजे महाकाल के इस भव्य रूप के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुँचे थे। जैसे ही भस्म अर्पण के उपरांत भगवान का निराकार से साकार रूप प्रकट हुआ, पूरा मंदिर परिसर 'जय महाकाल' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
गुरुवार की सुबह ठीक 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों द्वारा गर्भगृह में सभी स्थापित देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद भगवान महाकाल का जल और दूध, दही, घी, शक्कर, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से स्नान-अभिषेक कराया गया। घंटानाद के बीच हरिओम जल अर्पित करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड, रजत चंद्र और चंदन का लेपन किया गया।
भस्म आरती की प्राचीन परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंकने के बाद महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म रमाई गई। भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप में विशेष श्रृंगार शुरू हुआ। उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और गुलाब के फूलों की सुगंधित मालाएँ अर्पित की गईं। इसके बाद बाबा को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएँ भी कहीं और महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।
















