सीहोर, 19 सितंबर।
सीहोर जिले के चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर एवं कुबेरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में शनिवार को राधाष्टमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। पर्व के अवसर पर सुबह से ही कुबेरेश्वरधाम में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन-पूजन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे। पूरे दिन भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान होते रहे।
राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया गया। चांदी के कलशों से विधि-विधान के साथ महाभिषेक किया गया। इसके बाद 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर महाआरती की गई। प्रतिमाओं को चांदी, सोने और रत्न जड़ित पोशाकों तथा आभूषणों से सजाया गया। विशेष श्रृंगार के बाद मंदिर परिसर में राधा नाम का संकीर्तन हुआ। मथुरा-वृंदावन से आए कलाकारों ने भजन और संकीर्तन प्रस्तुत किए। श्रद्धालु भजनों पर झूमते हुए राधा-कृष्ण के जयकारे लगाते रहे।
मुख्य धार्मिक कार्यक्रम में विठलेश सेवा समिति के पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला, कथावाचक पंडित राघव मिश्रा सहित अन्य श्रद्धालु और सेवक मौजूद रहे। पूजन के बाद चांदी के कलशों से महाभिषेक किया गया। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।
राधाष्टमी पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार राधारानी की आराधना के बिना श्रीकृष्ण की भक्ति अधूरी मानी जाती है। उन्होंने राधा नाम को प्रेम, समर्पण और भक्ति की भावना का प्रतीक बताया। उनके अनुसार राधा-कृष्ण की आराधना से सनातन परंपरा में प्रेम, विश्वास और समर्पण का संदेश मिलता है।
पंडित मिश्रा ने कहा कि राधाष्टमी से महालक्ष्मी व्रत के आरंभ की भी धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार इस अवसर पर व्रत और पूजन करते हैं। उन्होंने शिव आराधना के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए सेवा, संयम, करुणा और लोककल्याण की भावना को जीवन में अपनाने की बात कही।
राधाष्टमी के बाद रविवार को भी कुबेरेश्वरधाम में धार्मिक आयोजन होंगे। कुबेर भंडारी गणेश उत्सव समिति की ओर से शाम सात बजे महाआरती आयोजित की जाएगी। इसमें पंडित विनय मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
















